NCERT की एक कविता में लिखे ‘छोकरी’ शब्द पर मचा बवाल, जानें क्या है पूरा मामला

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एनसीईआरटी (NCERT) की एक किताब में छपी कविता ने इस समय सोशल मीडिया पर बवाल मचा रखा है. एक किताब में ‘आम की टोकरी’ शीर्षक से लिखी कविता में छह साल की बच्ची के लिए ‘छोकरी’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है जिस पर बॉलीबुड के अभिनेता आशुतोष राणा और आइएएस अवनीश शरन ने आपत्ति जताई है. लोगों ने इस कविता को पाठ्यक्रम से बचाने की मांग की है. आपको बता दें कि यह किताब एनसीईआरटी की कक्षा एक में पढ़ाई
जा रही है.

छह साल की बच्ची के लिए ‘छोकरी’ शब्द का इस्तेमाल करने पर अभिनेता आशुतोष राणा ने भड़कते हुए फेसबुक पर लिखा कि एक तरफ़ हम हिंदी भाषा के गिरते स्तर और हो रही उपेक्षा पर हाय तौबा मचाते हैं और दूसरी ओर इतने निम्न स्तर की रचना को पाठ्यक्रम का हिस्सा बना देते हैं .

उन्होंने लिखा कि ऐसी रचना को निश्चित ही पाठ्यक्रम में नहीं रखा जाना चाहिए क्योंकि जैसे सिंह की पहचान उसकी दहाड़ होती है, हाथी की पहचान उसकी चिंघाड़ होती है वैसे ही मनुष्य की पहचान उसकी भाषा होती है. आगे उन्होंने लिखा कि अगर भाषा मरी तो हम भी बच नहीं सकते हैं.

इसके बाद उन्होंने आगे लिखा कि भले ही हों करोड़ों गुण, मगर हम कुछ रच नहीं सकते हैं. महज़ भाषा नहीं, यह मां हमारी हमको रचती है. बचेगी लाज जब इसकी हमारी लाज बचती है. फिर आखिर में उन्होंने लिखा कि मुझे विश्वास है एनसीईआरटी इस पर निश्चित ही विचार करेगा.

कविता को पाठ्यक्रम से हटाने की मांग

कविता में छोकरी शब्द का इस्तेमाल करने पर छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस ने ट्वीटर पर ऐतराज जताया हैं. 2009 बैच के आईएएस अधिकारी अवनीश शरन ने किताब में छपी कविता को पाठ्यक्रम से हटाने की मांग करते हुए लिखा है किसाझा करते हुए ट्विटर अकाउंट पर लिखा है कि ये किस सड़क छाप कवि की रचना है? कृपया इस पाठ को पाठ्यपुस्तक से बाहर करें.

मीडिया रिपोर्ट्स सें मिली जानकारी के मुताबिक यह कविता रामकृष्ण शर्मा खद्दर ने लिखी है. इसे एनसीईआरटी के कक्षा एक के सिलेबस में रखा गया है. यानि कि इस कविता को छह साल की बच्चियां पढ़ती हैं. आपको बता दें कि यह कविता कक्षा एक के बच्चे 2006 से लगातार पढ़ रहे हैं.

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