बॉलीवुड के 7 ऐसे सितारें जिन्होंने अपने दौर में हर फिल्मों में किया है काम

Jonny &Brahmanandam
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एक अच्छी सिनेमा के लिए लोग मेंन एक्टर और एक्ट्रेस को ही श्रेय देते हैं। लेकिन एक अच्छे फिल्म के पीछे हर कलाकार का किरदार अहम होता है। एक अच्छे कलाकार को इस बात से फ़र्क नहीं पड़ता कि वो कितनी देर स्क्रीन पर दिख रहा है। 5 मिनट के रोल में भी ये सितारें फिल्म में जान डाल सकते हैं। भारतीय सिनेमा ने कई ऐसे ही अभिनेता दिए हैं।

आज हम कुछ ऐसे ही सितारों के बारे में बात करने वाले जो अपने दौर की लगभग हर फिल्मों में देखे गए। लोगों का ऐसा भी कहना है कि एक दौर में इनके बिना कोई फिल्म नहीं चलती थी। ये सिर्फ हिंदी फिल्मों के अभिनेता नहीं बल्कि अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में काम कर चुके हैं।

मेहर मितल

भले ही मेहर मितल सिनेमा का हिस्सा ना हो लेकिन एक सच्चे सिनेमा प्रेमी के लिए इस नाम को किसी परिचय की जरूरत नहीं है। वह पंजाबी सिनेमा के कॉमेडी किंग कहे जाते थे। एक समय था जब कोई भी फिल्म उनके बिना पूरी नहीं मानी जाती थी। उनका जन्म 1935 को पंजाब भटिंडा में हुआ था और उन्होंने करीबन 300 फिल्मों और नाटकों में अभिनय किया।

उन्होंने अपनी करियर की शुरुवात वकालत से की लेकिन नियति उन्हें अभिनय के छेत्र में ले आई। इन्होंने अपने करियर की शुरुवात साल 1974 में सच्चा मेरा रूप नामक पंजाबी फिल्म से की थी। इश्क निमाना, चन्न परदेशी, लौंग दा लिशकारा, नीम्मो जैसी हिट में निभाय गए, इनके शानदार अभिनय को लोग आज भी बहुत पसंद करते हैं।

मेहर मितल को अनेक अभिनय के लिए दादा साहेब फाल्के अवार्ड तथा पंजाब स्टेट अवार्ड जैसे कई अवार्ड्स से उन्हें सम्मानित किया गया। 22 अक्टूबर 2016 को कॉमेडी का ये बादशाह ने दुनियां को अलविदा कह दिया।

ब्रह्मानंदम

जब साउथ फिल्मों की हिंदी डबिंग का चलन शुरू हुआ तो ये दक्षिण भारत की फिल्में हिंदी भाषियों को भी खूब भाने लगी। ऐसे में जो लोग साउथ के फिल्मों के स्टार्स से अंजान थे लोग उन्हें जानने लगे थे। ऐसा कहना गलत नहीं होगा की एक समय साउथ की अधिकतर फिल्में इनके बिना नहीं बनती थी।
यह एक ब्रिलियंट आर्टिस्ट हैं। इनका जन्म 1 फरवरी 1956 को आंध्र प्रदेश के गुंटर में हुआ था। उन्होंने अपनी फिल्मी करियर की फिल्म ‘अहा ना पेलता’ से की थी। वह अभी तक 1100 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि इनकी फीस करोड़ों में है जो की किसी भी हास्य अभिनेता की फीस से कहीं ज्यादा है। यहां तक कि उन्हें पांच नंदी अवॉर्ड, फिल्मफेयर बेस्ट कमीडियन अवॉर्ड और बेस्ट कमीडियन के लिए सिनेमा अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

जॉनी लीवर

जॉनी लीवर आंध्र प्रदेश के एक गरीब परिवार में उनका जन्म हुआ था। वह अपना पेट भरने के लिए मुंबई आ गए। उन्होंने कई तरह के काम किए हैं। जॉनी ने फिल्मी अभिनेताओं की नकल करते हुए सड़क पर पेन बेचते। उन्होंने हिंदुस्तान लीवर में अपने पिता के साथ मजदूरी भी की. एसी हिंदुस्तान लीवर कंपनी के नाम से जॉनी को नाम मिला जॉनी लीवर।

सुनील दत्त ही थे जिन्होंने जॉनी के टैलेंट को पहचाना और पहली बार दर्द का रिश्ता फिल्म से उन्होंने अपना ब्रेक थ्रू किया। उनको एक खुला आसमान मिल गया और इसके बाद उन्होंने ऐसी उड़ान भरी की फिर दुबारा पीछे मूढ़ कर कभी नहीं देखा।
जॉनी 350 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं। उन्हें उनके अभिनय के लिए 13 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड मिल चुका है।

अमरीश पुरी

एक जमाना था जब बॉलीवुड में खलनायक के नाम पर एक ही चेहरा सामने आता था और वो था अमरीश पुरी जी का। उनका जन्म 22 जून 1932 को पंजाब में हुआ था। उन्होंने अपने अभिनय से सभी लोगों का दिल जीत लिया। वह अपने बड़े भाई मदन पुरी की तरह ही एक सफल अभिनेता बनना चाहते थे और यही चाह उन्हें मुंबई कीच लाई।

जब उन्होंने अपना पहला स्क्रीन टेस्ट दिया तो वह उसमे फेल हो गए थे। लेकिन अमरीश जी ने हार नहीं मानी और श्री सत्यदेव दुबे के लिखे नाटकों पर पृथ्वी थिएटर में काम करते हुए अपने अभिनय को निखरते रहे। इन्हीं नाटकों ने उन्हें टीवी विज्ञापन तक पहुंचाया और फिर उन्होंने सफलता के शिखर को छू कर ही दम लिया। अमरीश जो रंगमंच पर अपने बेहतरीन अभिनय के लिए सन 1979 में संगीत नाटक अकादमी की तरफ से पुरुष्कर दिया गया। फिर सन 1971 में उन्हें प्रेम पुजारी फिल्म में एक छोटा सा किरदार मिला। उन्होंने अपने करियर में 400 से ज्यादा फिल्में की। 80 के दशक में अमरीश पुरी लगभग हर फिल्म में दिख जाते थे।

12 जनवरी 2005 को अमरीश पुरी इस दुनिया और सिनेमा जगत को अलविदा कह गए।

निरूपा रॉय

निरूपा रॉय को अगर फिल्म जगत की मां कहा जाए तो गलत नहीं होगा। भले ही अमिताभ बच्चन तेज़ी बच्चन के बेटे हों, लेकिन फिल्मी दुनिया में उनकी मां निरूपा रॉय को माना गया। किसी भी एक्ट्रेस ने इतनी बार बच्चन के साथ स्क्रीन नहीं शेयर किया होगा जितनी बार निरूपा रॉय ने उनकी मां का किरदार निभाया।
उनका जन्म 1931 में एक गुजराती परिवार में हुआ था। लेकिन 15 साल में ही उनकी शादी कमल रॉय से हो गई। उन्होंने अपनी करियर की शुरुवात सन 1946 में रणकदेवी नामक गुजराती फिल्म से की थी। उन्होंने लगभग 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है।

कन्हैयालाल चतुर्वेदी

80 के दशक के प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता माखूब खान ने 1940 में एक फिल्म बनाया ‘औरत’ फिल्म एक औरत और एक मां की कहानी थी। उन्होंने फिल्म में लाला सुखीराम का किरदार निभाया। फिल्म तो हिट हुए लेकिन मकूब खान संतुष्ट ना हुए। जिनके कर्म उन्होंने एसी विषय पर 17 साल बंद एक और फिल्म बनाई जिनका नाम था ‘मदर इंडिया’ कन्हैयालाल इसमें फिर से लाला सुखीराम के किरदार में दिखे और एक दम से छा गए। इसके बाद तो हिंदी सिनेमा की हर फिल्म में हिसाब किताब के लिए कन्हैयालाल को ही लाल, मुंशी, मुनीम, ये सब के किरदार में देखा जाने लगा।

उन्होंने अपने अनोखे अंदाज किरदारों की वजह से लोगों का मनोरंजन किया। इन्होंने लगभग 150 फिल्मों में अभिनय किया है।

मनोरमा

मनोरमा तमिल फिल्म जगत की मशहूर अभिनेत्री है। वह अपने जीवन में 1500 से अधिक फिल्में तथा 500 से अधिक नाटकों में अभिनय किया। 80 के दशक में 1000 से ज्यादा फिल्मों में काम करने के लिए इनका नाम गिनस वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हैं। उनको सब आंची कह के बुलाते थे।
इन्होंने अपने जीवन में पांच मुक्तमंत्रियो के साथ फिल्मों में अभिनय किया है। जिन्होंने इतनी फिल्मों में अभिनय किया हो, उनके किए तो कोई भी कह सकते हैं की इनके दौर की फिल्में इनके किरदार के बिना अधूरी रहती होगी।
इन्हें कई अन्य पुरुष्कारो के अल्वा अभिनय के छेत्र में ब्रिलियंट परफॉर्मेंस के लिए पदम श्री अवॉर्ड से समर्पित किया जा चुका है। वह 10 अक्टूबर 2015 को मनोरमा इस दुनियां को अलविदा कह गई।

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