कंगना राणावतः तैने चारों खाने चित कर देगी, ऐसी धाकड़ हैं

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‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ कांग्रेस की प्रियंका गांधी जब से इस नारे के साथ उत्तर प्रदेश में अपने चुनाव अभियान में लड़ रही है तब से ही स्त्री सशक्तिकरण का मुद्दा गरमाया जा रहा हैं। आज स्त्री सशक्तिकरण मुद्दे के खास पेशकश में बात कंगना राणावत की।

‘वह एक काला जादू करने वाली डायन है जो मेरे बेटे को खा जाना चाहती थी।‘- शेखर सुमन

‘मैं नहीं वह मेरे पीछे पड़ी थी। मेरे नाम और शोहरत का इस्तेमाल कर बॉलीवुड में अपने लिए जगह बनाना चाहती थी।‘- ह्रितिक रोशन

‘उसे मेंटल डिसऑर्डर है। उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है।’- राकेश रोशन

‘वह पागल है। साइको। झूठ बोलती है।’- आदित्य पंचोली

‘ऐसे लोगों के बारे में मैं नहीं बोलता। मेरा एक स्तर है।‘- महेश भट्ट

‘वह एक अनपढ़, दो कौड़ी की स्टार है। मैं उसकी किसी बात का जवाब देना ज़रूरी नहीं समझता।’- नसीरुद्दीन शाह

कंगना राणावत के बारे में इन सारे हस्तियों के बाद भी कंगना की जिंदगी एक संघर्ष है और उस संघर्ष को चाहने वाले करोड़ों में है।

पहली कंगना जो पहाड़ से मुम्बई में करियर बनाने आई थी। वह कंगना हर तरह के समझौते करने वाली एक साधारण सी लड़की थी जिसका बॉलीवुड के सत्ताधारियों ने खूब शोषण किया। रोल दिलाने से लेकर फिल्म दिलाने तक।

पुरुषवादी समाज में अपने लिए स्वीकार्यता खोजती कंगना अस्मिता पुरुषवादी समाज के नियमों के तहत ‘समझौते’ कर भी रही थी। ‘क्वीन’ आदि फिल्मों के समय विकास बहल ने भी कंगना का शोषण किया था, बस यह इस नई कंगना ने सबके सामने खोलकर रख दिया।

कंगना, भाजपा और नरेन्द्र मोदी युग की भु देन है। यह कंगना राजनीतिक रूप से हिन्दुत्त्ववाद और राष्ट्रवाद से खुद को जोड़ती है और फिर बॉलीवुड मज़बूत एकतरफा शोषक लॉबी के खिलाफ यलगार बोल देती है। इस कंगना ने सारे मानकों को ही जैसे धराशायी करने की ठान ली हो।

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