जन्मदिन मुबारक: जब एक पत्रकार ने अखिलेश से पूछा कि अगर आप राजनीति में नहीं आते तो आप क्या करते?

2012 का वक्त था। अखिलेश धौलपुर स्थित अपने मिलिट्री स्कूल एक कार्यक्रम पहुंचे थे जहां उन्होंने पढ़ाई की थी। विद्यालय का नाम पहले किंग जार्ज पंचम इंडियन मिलिट्री स्कूल था।

कार्यक्रम में अखिलेश ने छात्रों से कहा “स्कूल में कुछ भी नहीं बदला है। पंखे और उनकी आवाजें उसी तरह की है यहां तक कि वह तार भी वैसा ही है। जिससे हम अपनी मच्छरदानी लगाया करते थे। यह पेड़ वैसा ही हैं जहां मैंने खड़े होकर एक तस्वीर खिंचवाई थी यह उसी आकार का है।

अखिलेश ने फिर कहा मुझे एक जॉर्जियन होने पर गर्व है। यहां के प्रशिक्षण की वजह से मैं लंबे समय तक चुनाव के दौरान काम कर सकता हूं और सफलता हासिल करता हूं। अखिलेश ने फिर बोला मैं एक राजनैतिक पृष्ठभूमि से आता हूं इसलिये मैंने राजनीति में मुकाम बनाया अगर मैं किसी फौजी परिवार से आता तो निसंदेह मैंने फौज को चुना होता।

अखिलेश यादव विदेश के किसी विद्यालय में या दून या मायो कॉलेज में पढ़ सकते थे लेकिन उनके पिता ने उन्हें मिलिट्री स्कूल में भेजना तय किया। अखिलेश के ज्यादातर दोस्त स्वाभाविक रूप से सेना में शामिल हैं और पूरे देश में फैले हुए हैं।

इन घटनाओं को अपनी किताब में लिखने वालीमशहूर पत्रकार सुनीता ऐरन अखिलेश के साथ यात्रा कर रही थी। उन्होंने अखिलेश से पूछा कि अगर आप राजनीति में नहीं आते तो आप क्या करते ?

जवाब में वे मुस्कुराए और टाल गए। फिर थोड़ी देर बाद हेलीकाप्टर से नीचे की तरफ यूपी की हरी-भरी तराई को देखते हुए बोले ” सिख समुदाय के लोग जानते हैं कि कैसे कृषि योग्य जमीन को मेहनत करके सोने की खान में बदला जा सकता है यहां के बेरोजगार लोगों को वृक्षारोपण के काम में लगा कर उनका ख्याल रखकर उत्तर प्रदेश को एक आसानी से हरित क्षेत्र में विकसित किया जा सकता है हमें कंक्रीट का जंगल बनाने की जरूरत नहीं है।

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