आगरा स्थित पारस अस्पताल में ऑक्सीजन मॉकड्रिल से नहीं हुई मौतें, मिली क्लीन चिट: जांच रिपोर्ट

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यूपी के आगरा स्थित पारस हॉस्पिटल में अप्रैल में ऑक्सीजन की कमी से 22 मरीजों की मौत के मामले की जांच रिपोर्ट आ गई है. मॉकड्रिल मामले में हॉस्पिटल को प्रशासन ने क्लीनचिट दी गई है. देर रात जारी की गई मजिस्ट्रेटी जांच और डेथ ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया कि 26 अप्रैल की सुबह 96 मरीजों पर मॉकड्रिल नहीं की गई. हालांकि 26-27 अप्रैल को सात की जगह 16 मौतों को स्वीकार किया गया है.

वीडियो हुए थे वायरल

बतादें 28 अप्रैल को श्री पारस अस्पताल के चार वीडियो वायरल हुए थे. इन वीडियो में हॉस्पिटल संचालक डॉ अरिंजय जैन को यह कहते हुए सुना गया था कि ऑक्सीजन की कमी है, इसलिए मॉक ड्रिल कर ली जाए और इसके बाद 22 मरीज ‘छंट गए’. 26 अप्रैल की कहानी बयां करने वाले वीडियो में 22 मरीजों के हाथ पैर नीले पड़ने की बात भी अरिंजय जैन ने कही थी. वीडियो में कहीं गईं बातों को लेकर पूरे सूबे में हड़कंप मच गया था. मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेकर पूरे मामले की जांच के आदेश डीएम प्रभु एन सिंह को दिए. दो जांच कमेटियां बनाईं गईं.

जांच रिपोर्ट के अनुसार ऑक्सीजन की कमी से पारस हॉस्पिटल में किसी की भी मौत नहीं हुई थी. जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में पारस हॉस्पिटल समेत सभी अस्पतालों में उपलब्ध था. साथ ही जांच रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि पारस हॉस्पिटल के संचालक किसी भी कीमत पर ऑक्सीजन देने के लिए परेशान हैं, यह बात वायरल वीडियो में उन्होंने खुद कही है. रिपोर्ट में 16 मरीजों की मौत का जिक्र करते हुए उनकी लिस्ट भी पेश की गई है, इसमें कहा गया है कि 14 मरीजों की हालत अत्यंत गंभीर थी. इनमें 8 मरीज वेंटीलेटर पर पर थे.

महामारी अधिनियम में हो रही कार्रवाई

रिपोर्ट में है कि प्रबंधन द्वारा मरीजों को ऑक्सीजन की कमी का हवाला देते हुए डिस्चार्ज करने की बात सामने आई है. इसलिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा भ्रम पैदा करना माना गया. उनके खिलाफ महामारी अधिनियम 1897 के तहत 180/21 अंतर्गत धारा 25/5 महामारी अधिनियम आईपीसी की धारा 118/505 में मुकदमा पंजीकृत किया गया. जिसकी पुलिस विवेचना कर रही है. वहीं सीएमओ ने श्रीपारस हॉस्पिटल के लाइसेंस को निलंबित कर सील कर दिया है। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन का जो भी जवाब आएगा. उसके अनुसार सीएमओ द्वारा कार्रवाई की जाएगी.

जांच रिपोर्ट नहीं की सार्वजनिक

जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है. उसमें 50 से 75 पन्ने हैं. आगे मामले की जांच पुलिस करेगी. जिन दस लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी उन्हें डेथ समरी दी गई है. प्रेस रिपोर्ट में जांच के सभी मुख्य बिन्दुओं को शामिल किया है. प्रभु नारायण सिंह, जिलाधिकारी, आगरा

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