भारतीय महिलाओं के काम आएगी ‘वायग्रा’?

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वायग्रा और सेक्सुअल डिज़ायर ये शब्द ही भारत में बदचलन का प्रतीक है। खासकर तब जब बात महिलाओं कि की जाए। भारतीय समाज में सेक्स में महिलाओं के आनंद को अहमियत नहीं दी जाती।

भारत में महिलाओं की सेक्स सबंधी जुड़ी बीमारियों पर किए गए शोध के अनुसार 77 प्रतिशत महिलाओं में ‘सेक्सुअल डिज़ायर’ की कमी है। यहीं सर्वे जब अमेरिका पर किया गया। तब ये दर क़रीब 33 फ़ीसदी पाई गई।

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वर्ल्ड बैंक के सर्वे अनुसार भारत में 15 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं में से केवल 27 फ़ीसदी महिलाएं घर से बाहर निकल कर काम पर जाती है। बाकी की दुनिया बेडरूम तक ही सीमित है। इसलिए ‘सेक्सुअल डिज़ायर’ बढ़ाने वाली महंगी दवा लेने की आज़ादी और विकल्प बहुत कम के पास ही मौजूद है।

हमारे देश में कामसूत्र ज़रूर लिखी गई, पर वो सेक्स की क्रियाओं के बारे में है। औरत की डिज़ायर आज भी एक ख्वाब ही हैं।

इस सब से परे सेक्स दुनिया का सच यह है कि जब तक औरत की डिज़ायर पुरुष की ज़रूरत के समान नहीं आंकी जाएगी, तब तक सेक्स और उसमें दिलचस्पी का असंतुलन बना रहेगा। इस बात को संतुलित दवाई कुछ ही हद तक कर पाएगी।

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