अपरा एकादशी पर इस प्रकार करें ईश्वर को प्रसन्न, जानिए महत्व और पूजा विधि

पोला पर्व
image credit:- wikimedia

हिंदू धर्म में पंचांग के अनुसार कृष्ण और शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि यानी ग्यारस को एकादशी कहा जाता है. इस एकादशी के प्रत्येक माह में अपने कुछ नाम भी है, आज हम बात करेंगे अपरा एकादशी की, यह एकादशी जेष्ठ महा के कृष्ण पक्ष में ग्यारस के दिन मनाई जाती है. इस वर्ष यह एकादशी 6 जून को मनाई जाएगी. एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा और आराधना करने से ना–ना प्रकार के दुखों और कष्टों से हमें निजात मिल जाती है. आइए आज हम जानेंगे कि अपरा एकादशी पर व्रत रखने पर हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं.

अपरा एकादशी महत्व और पूजा विधि

अपरा एकादशी पर व्रत रखने वाले मनुष्य को चावल से दूर रहना चाहिए. उसे अपने खाने के समय चावल नहीं खाने चाहिए. विष्णु पुराण के अनुसार यदि कोई व्यक्ति चावल का सेवन करता है तो वह व्यक्ति पाप का भागीदार हो जाता है, साथ ही साथ भगवान विष्णु उस मनुष्य से रुष्ठ भी हो जाते हैं. एकादशी के व्रत पर हमें भगवान विष्णु का भजन कीर्तन करना चाहिए. भजन कीर्तन के माध्यम से भगवान विष्णु अपने भक्तों से अत्यंत प्रसन्न होते हैं. इस एकादशी व्रत में व्रती को नींद से भी परेहज करना चाहिए और भजन कीर्तन में ही रात व्याप्त करनी चाहिए.

एकादशी व्रत के दौरान क्रोध करना पूर्णतः वर्जित माना गया है. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के दौरान क्रोध करना एक प्रकार की मानसिक हिंसा है, इसलिए व्रत की अवधि में क्रोध नहीं करना चाहिए.

इस एकादशी में कासे के बर्तन में भोजन करना चाहिए. और इस दिन दातुन से दांत साफ नही करने चाहिए, उससे भगवान विष्णु रुष्ठ हो सकते है.

ऐसी मान्यता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु मनुष्य के जीवन से सभी दुख और परेशानियों को दूर कर अपार पुण्य प्रदान करते हैं. यह एकादशी बहुत पुण्य प्रदान करने वाली और बड़े-बड़े पातकों का नाश करने वाली है. अपरा एकादशी के व्रत के प्रभाव से ब्रह्म हत्या, भूत योनि, दूसरे की निंदा,परस्त्रीगमन, झूठी गवाही देना, झूठ बोलना, झूठे शास्त्र पढ़ना या बनाना, झूठा ज्योतिषी बनना तथा झूठा वैद्य बनना आदि सभी पाप नष्ट हो जाते है.

यह भी पढ़ें: हिन्दू धर्म में स्वास्तिक का महत्व जानकर आप हो जाएंगे हैरान