घर में ना होने पाए कभी अन्न की कमी तो ऐसे कीजिए अन्नपूर्णा माता को प्रसन्न

अन्नपूर्णा
Image credits: Unspalsh

इस संसार में हर व्यक्ति यहीं चाहता है कि उसके घर के भंडार में मां अन्नपूर्णा की कृपा सदैव बनी रहे. यदि आपके घर मेहमानों का आगमन हो तो मां कभी भी आपके घर में खाने की दिक्कत न होने दे. अगर आप इन चीजों का रखेंगे ध्यान तो सदैव मां आपके भंडारे भरेगी.

हिंदू धर्म के अनुसार जब भी रोटी बनाई जाती है तो उस समय पहली रोटी अग्नि तो चढ़ाई जाती है. धर्म में पहली तीन रोटियों का अधिक महत्व माना जाता है, जिसमे पहली रोटी अग्नि को, दूसरी गौ माता को और तीसरी कुत्ते के लिए निकली जाती है. ऐसी भी मन्यता है कि अग्नि में पकाएं गए भोजन पर पहला अधिकार अग्नि का ही होता है.

ऐसे कीजिए अन्नपूर्णा माता को प्रसन्न

भोजन की थाली को हमेशा पाट, चटाई, चौक या टेबल पर सम्मान के साथ रखें. खाने की थाली को कभी भी एक हाथ से न पकड़ें. ऐसा करने से खाना प्रेत योनि में चला जाता है. भोजन करने के बाद थाली में ही हाथ न थोएं. थाली में कभी जूठन न छोड़े. भोजन करने के बाद थाली को कभी, किचन स्टेन, पलंग या टेबल के नीचे न रखें. उपर भी न रखें. रात्रि में भोजन के जूठे बर्तन घर में न रखें. भोजन करने से पूर्व देवताओं का आह्‍वान जरूर करें. भोजन करते वक्त वर्तालाप या क्रोध न करें. भोजन करते समय अजीब सी आवाजें न निकालें.

हिंदू धर्म में भोजन के समय व्यक्ति को सबसे पहले 3 ग्रास (कोल) निकलने होते है, जिसको त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का भोग माना जाता है। वहीं कुछ पौराणिक कथाओं के आधार पर इन्हें गौ माता, कौआ और कुत्ता के लिए माना जाता है. यही भोजन का नियम भी माना जाता है.

अतिथि को मेहमान समझा जाता है. ऐसा मेहमान या आगुंतक जो बगैर किसी सूचना के आए उसे अतिथि कहते हैं. हालांकि जो सूचना देकर आए वह भी स्वागत योग्य है. घर आया मेहमान यदि अन्न, स्वल्पाहर या जल ग्रहण करके नहीं जाता है तो यह सही नहीं है. अतिथि का शाब्दिक अर्थ परिव्राजक, सन्यासी, भिक्षु, मुनि, साधु, संत और साधक से भी है.

यह भी पढ़ें: Environment Day 2021: वास्तु के अनुसार किस दिशा में करना चाहिए पौधारोपण