आखिर ऐसा क्या हुआ था जो महाराज दशरथ को श्री राम को वनवास देना पड़ा! जानिए रामायण का सार

रामायण
Image Credit:- Wikimedia

हिंदू धर्म का एक पवित्र ग्रंथ रामायण है. महर्षि वाल्मीकि द्वारा महाकाव्य संपूर्ण रामायण को लिखा गया है. इस सम्पूर्ण रामायण को महर्षि वाल्मीकि ने सात कांडों में विभाजित किया है. समस्त कांडों में रघुकुल नंदन प्रभु श्री राम , माता सीता और लक्ष्मण जी के बारे में बताया गया है, जो कि भक्ति, कर्तव्य, रिश्ते, धर्म और कर्म की सही मायनों में व्याख्या है.

रामायण का सार

प्रभु श्री राम का जन्म चैत्र मास की नवमी के पावन दिन अयोध्या में महाराजा दशरथ और माता कौशल्या के यहां हुआ था. राजा दशरथ की अन्य पत्नियों कैकई और सुमित्रा की कोख से भरत और लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न पैदा हुए. राम, लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न, इन सभी भाइयों ने गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा दीक्षा प्राप्त की और उसी बीच सीता स्वयंवर भी हुआ.

शिक्षा प्राप्त करने के बाद ये लोग अयोध्या वापस आए तो अयोध्या के राजा दशरथ ने श्री राम को अयोध्या की राजगद्दी का उत्तराधिकारी बनाने का विचार किया. श्री राम के राजतिलक की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं, हर तरफ खुशी का माहौल था. तभी महाराज दशरथ की पत्नी कैकेयी ने दशरथ जी से दो वरदान मांग लिए, दरसल एक बार युद्ध के दौरान कैकेयी ने महाराज दशरथ की जान बचाई थी तो दशरथ उनसे वरदान मांगने को कहा था. यह वही वरदान थे जो कैकेयी ने राम के राज्याभिषेक के समय मांगे.

कैकेयी ने महाराज दशरथ से पहले वरदान में अपने पुत्र भरत के लिए राजगद्दी और दूसरे वरदान में राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। बस इसी के बाद सारी खुशियां समझो मातम में बदल गईं, क्योंकि किसी को भरत के लिए राजगद्दी मांगने से ऐतराज नहीं था किंतु राम के 14 वर्ष का अज्ञात वास मांगना सभी को शूल की तरह चुभा.

श्री राम के साथ माता सीता और लक्ष्मण जी भी अपनी स्वेच्छा से गए. इसके पश्चात ही महाराज दशरथ की आत्मा परमात्मा में विलीन हो गयी. जब कैकेयी के पुत्र भरत अयोध्या वापस लौटे और उन्हें ये सब बातें पता चली तो उन्होंने अपनी माता कैकेयी को बहुत खरी-खोटी सुनाई और राजगद्दी को अस्वीकार करते हुए श्री राम को वापस अयोध्या लाने का प्रयास करने लगे. उन्होंने श्री राम से बहुत विनती की किन्तु जब वह वापस नहीं आए तो उन्होंने उनसे उनकी चरणपादुका मांग ली और अयोध्या आकर उन्हें राजगद्दी पर विराजित करके खुद तपस्या करने चले गए.

उधर वन-वन भटकटे हुए श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने कई असुरों का वध किया. एक बार लंका के राजा रावण की बहन शूर्पणखा का प्रेम प्रस्ताव लक्ष्मण जी द्वारा ठुकरा दिया गया व उसके नाक-कान काट दिए गए तो क्रोधित होकर रावण ने माता सीता का हरण कर लिया।

जिसके बाद भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी वानर सेना की सहायता से लंका पहुंचे और वहां जाकर उन्होंने रावण का वध कर दिया और माता सीता को अपने साथ ले आए। फिर अयोध्या लौटकर श्री राम ने राजगद्दी सम्भाली।

रामायण का सार या राम के चरित्र का वर्णन करना एक असम्भव कार्य है, यदि इस लेख में कोई त्रुटि हुई तो उसके लिए क्षमा करें.

यह भी पढ़ें: भगवान कृष्ण अपने सिर पर मोर पंख क्यों धारण करते हैं