Kabirdas jayanti 2021: भक्तिकाल के महान् कवि और संत कबीर दास की जयंती पर विशेष

संत कबीर दास
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संत कबीर दास भक्‍तिकाल के एकमात्र ऐसे कवि हैं, जिन्‍होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज सुधार के कार्यो में लगा दिया. कबीर कर्म प्रधान कवि थे, उनका उल्‍लेख उनकी रचनाओं में देखने को मिलता है. कबीर का संपूर्ण जीवन समाज कल्‍याण एवं समाज हित में उल्लेखनीय है. कबीर, हकीकत में विश्‍व प्रेमी व्‍यक्‍तित्व के कवि माने जाते हैं.

संत कबीरदास का जन्म जिस समय हुआ था, उस समय ये संसार जात पात, धर्म मजहब के अंधविश्वास में फंसा हुआ था. उनका जन्म विक्रम संवत 1455 में हुआ था और मृत्यु 1575 में हुई. कबीरदास के जन्म का कोई भी पक्का पता नहीं लगा पाया था, किसी को भी नही पता था कि उनका जन्म कहां हुआ था और उनके माता पिता कौन थे. लेकिन लोग कबीरदास की तुलना भगवान श्री कृष्ण से करते है क्योंकि उन्हें जन्म देने वाली मां दूसरी थी और पालने वाली दूसरी, उसी प्रकार कबीरदास को जन्म देने वाली मां भी अलग थी और पालने वाली अलग.

संत कबीर दास जयंती का महत्व

कबीर बीच बाजार और चौराहे के संत थे. वे आम जनता से अपनी बात पूरे आवेग और प्रखरता के साथ किया करते थे, इसलिए कबीर परमात्मा को देखकर बोलते थे कि हम आज समाज के जिस युग में हम जी रहे हैं, वहां जातिवाद की कुत्सित राजनीति, धार्मिक पाखंड का बोलबाला, सांप्रदायिकता की आग में झुलसता जनमानस और आतंकवाद का नग्न तांडव, तंत्र-मंत्र का मिथ्या भ्रम-जाल से समाज और राष्ट्र आज भी उभर नहीं पाया है.

कबीरदास के इसी व्यक्तित्व के कारण वह सबसे अलग थे और संसार उनको पूजता है, इस वर्ष कबीर दास की 643वीं जयंती है. ये जयंती 24 जून को सम्पूर्ण विश्व में मनाई जाएगी.

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