Lord Vishnu: पृथ्वी पर धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने लिया था मत्स्य अवतार, जानिए उससे जुड़ी रोचक कहानियां…

भगवान विष्णु
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संसार में जब-जब धर्म ने अपना प्रसार किया है, तब-तब भगवान विष्णु ने किसी न किसी रूप में अवतार लेकर संसार का उद्धार किया है. चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान विष्णु ने मत्स्य के रूप में अवतार लिया. मत्स्य का अर्थ है “मछली”. धार्मिक पुराणों के लेखन से पता चलता है कि भगवान विष्णु ने पृथ्वी को जल प्रलय से बचाने हेतु अवतार लिया था. इस अवतार में उन्होंने मनु (जो कि ब्रह्मा की संतान थे) को एक नाव बनाकर ऋषि-मुनियों, स्त्री-पुरुष, बच्चों, पशु-पक्षी, जीव-जंतु को रखने का आदेश दिया. प्रलय के पश्चात भगवान ब्रह्मा ने संसार में पुनः जीवन का निर्माण किया.

मत्स्य अवतार की कुछ पौराणिक कथाएं

1:- एक बार ब्रह्मा जी की लापरवाही के कारण एक हयग्रीव नामक राक्षस ने वेदों को चुराकर समुद्र की अथाह गहराई में छुपा दिया. वेदों को चुरा लिए जाने के कारण समस्त संसार में अंधकार छा गया, सृष्टि से ज्ञान-विद्या लुप्त हो गई, राक्षसों ने मनुष्य की प्रजाति का जीवन समाप्त करना प्रारंभ कर दिया. पृथ्वी की सीमा तक जगत में पाप व अधर्म फैल गया था. तब धर्म की रक्षा, मानव कल्याण व सृष्टि मे पुनः सभी प्रजातियों के जीवन की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण कर पृथ्वी पर अपना प्रथम अवतार लिया व राक्षस हयग्रीव का वध करके पृथ्वी का कल्याण किया।

2:- कहते हैं एक बार जब द्रविड देश के राजा सत्यव्रत प्रातः काल की बेला में कृतमाला नदी के तट पर स्नान कर रहे थे स्नान के पश्चात सूर्य देव को जल अर्पित करने के लिए उन्होंने अपने दोनों हाथों की अंजनी में जल लिया तो उनके हाथ में एक छोटी सी मछली आ गई. राजा ने मछली के जीवन की रक्षा के लिए पुनः उसे नदी में उतार दिया. तब मछली ने राजा से आग्रह किया कि- “हे राजन! इस नदी में बड़े-बड़े जी रहते हैं जो अपनी भूख मिटाने के लिए एक दूसरे को खा जाते हैं. मेरा आकार अभी छोटा है, मुझे भय है कि वह मुझे भी मार कर खा जाएंगे. मेरा आपसे आग्रह है कि मेरी रक्षा करें.”

मछली के इस आग्रह पर राजा ने मछली को अपने एक कमंडल में डाल लिया और अपने घर ले आए. लेकिन एक रात में उन्होंने देखा कि मछली का शरीर का आकार बढ़ गया है, तब उन्होंने मछली को एक बड़े मटके में डाल दिया परन्तु मछली मटके में भी मछली का आकार एक ही रात में और बड़ा हो गया. तब राजा ने मछली को मटके से निकाल कर तालाब में डाल दिया. एक ही रात में मछली के लिए तालाब भी छोटा प्रतीत होने लगा, तब सत्यव्रत ने मछली को पहले नदी में तथा फिर समुद्र में डाल दिया. परंतु मछली के लगातार बढ़ते हुए आकार को देखकर सत्यव्रत को संशय हुआ कि यह कोई साधारण मछली नहीं है. तब सत्यव्रत ने अपने हाथों को प्रणाम की अवस्था में लाकर अपने विस्मय भरे शब्दों में कहा कि-

“हे मछली! रूपी शक्ति कृपया आप मुझे अपने वास्तविक दर्शन दे” तब मत्स्य का रूप लिए श्री नारायण विष्णु ने सत्यव्रत को उत्तर दिया- “हे राजन! एक हयग्रीव नामक राक्षस ने देवताओं के वेदों को चुरा लिया है. संसार में अधर्म, पाप और अन्याय ने स्थान ले लिया है इसीलिए जगत के कल्याण हेतु आज से 7 दिन पश्चात पृथ्वी पर एक प्रलय आएगा. तब आपके पास एक नौका आएगी, जिसमें आपको सभी जीव-जंतु, ऋषि-मुनि, बीज, औषधियों के साथ नौका में आना होगा. यदि प्रलय के समय नौका भँवर मे आ जाती है तो मैं आपकी रक्षा करूंगा.”राजा ने ठीक ऐसा ही किया तथा प्रलय के दिन नौका आई.

राजा सभी के साथ नौका में बैठ गए तथा प्रलय में जब नौका डगमगाए तब उन्होंने मत्स्य अवतार मे मौजूद श्री हरी के सींग से बाँध दिया तथा मत्स्य अवतार में नौका को प्रलय से खींचकर हिमालय की चोटी पर ले जाकर बांध दिया तथा प्रलय शांत हो जाने पर राक्षस हयग्रीव का वध कर दिया. तथा वेदो को पुनः प्राप्त करके भगवान ब्रह्मा को लौटा दिया. श्री हरि ने सत्यव्रत को वेदों का ज्ञान दिया एवं यह ज्ञान प्राप्त कर वह वैवस्त मनु कहलाए तथा नौका में होने के कारण जीवित बचे सभी प्राणियो ने संसार में पुनः जीवन आरंभ किया.

भगवान विष्णु के दस अवतार

1:- मत्स्य
2:- कूर्म
3:- वराह
4:- नरसिंह
5:- वामन
6:- परशुराम
7:- राम
8:- कृष्ण
9:-बुद्ध
10:- कल्कि

इस प्रकार भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप में प्रथम अवतार लेकर संसार का कल्याण किया.

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