Marriage facts: हिंदू धर्म में अग्नि को साक्षी मानकर क्यों लिए जाते हैं 7 फेरे? जानें रहस्य…

मंगल दोष
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हिंदू धर्म में शादी को एक पवित्र बंधन माना जाता है. इसी वजह से धर्म में रीति रिवाज के साथ अग्नि के 7 फेरे लेकर और 7 वचनों के साथ के साथ दो लोग शादी के बंधन में बंधते है. हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार मानव शरीर पंच तत्वों के मिश्रण से बना हुआ है. ये तत्व हैं – जल, वायु, आकाश, पृथ्वी और अग्नि.

जिसमें से जल का संतुलन शरीर में बनाए रखने के लिए हमें जल को ग्रहण करना पड़ता है. वायु से श्वसन क्रिया होती है. पृथ्वी से उर्जा प्राप्त होती है. आकाश वर्ष के द्वारा पृथ्वी का पोषण होता है. तो वहीं अग्नि हमारे प्रयत्नों के फलस्वरूप उत्पन्न होती है. अग्नि में इतनी क्षमता होती है की वह हमारे संसार की समस्त वस्तुओं को अपने अंदर समाहित कर सकती है. इसीलिए हिंदू धर्म के अनुसार अग्नि को भी देव रूप में पूजा जाता है और अग्निदेव के नाम से जाना जाता है.

अग्नि को साक्षी मानकर इसलिए लिए जाते हैं 7 फेरे

हिंदू धर्म में इसी कारण से प्रत्येक धार्मिक कार्यक्रम, विवाह और यज्ञ में अग्नि प्रज्वलित की जाती है. इन सभी कार्यों में अग्नि का अपना अलग अलग महत्व है. चलिए अब जानते है विवाह के समय अग्नि के समक्ष 7 फेरे क्यों लिए जाते है.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि की देखभाल का कार्य विष्णु भगवान आज्ञा से संचालित होता है. चूँकि अग्नि में सृष्टि के सभी वस्तुओं को अपने अन्दर समाने की क्षमता होती है. इसलिए अग्नि को विष्णु भगवान का मुख माना जाता है. हिन्दू धर्म में विवाह की शुरुआत अग्नि को साक्षी मानकर प्रारंभ की जाती है और विवाह के दौरान पहला मन्त्र मंगलम भगवन विष्णु से प्रारंभ किया जाता है.

जीवन के तीसरे और अहम चरण की शुरुआत करने से पूर्व देवताओं की आज्ञा लेने एवं उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मन्त्रों का उच्चारण किया जाता है. चूँकि सृष्टि के रचियता का कोई आकार नहीं है. इसलिए देवताओं की तृप्ति एवं आशीर्वाद पाने के लिए निराकार मन्त्रों का उच्चारण निराकार अग्नि को साक्षी मानकर किया जाता है.

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