Roli facts: पूजा की थाली में क्यों रखी जाती है रोली? जानिए इसके पीछे की वजह…

गुरु पूर्णिमा
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हिंदू धर्म एक ऐसा धर्म है जहां प्रत्येक काम रीति रिवाजों के साथ किया जाता है. धर्म में रीति रिवाजों का अधिक महत्व माना गया है. हिंदू धर्म में रीति रिवाजों के पालन के लिए कई पूजा की सामंग्रियो का प्रयोग किया जाता है, इन्हीं सामग्रियों में से एक है रोली. रोली का उपयोग धर्म के किसी भी कार्य में होना आम बात है.

अब जानते है कि रोली को हिंदू धर्म में पूजा पाठ और रीति रिवाजों के लिए क्यों प्रयोग किया जाता है

रीति रिवाजों के समय धर्म के अनुसार रोली का प्रयोग मस्तिष्क पर इसलिए किया जाता है क्योंकि धर्म में मस्तिष्क का खाली रहना अशुभ माना जाता है इसलिए हिंदू धर्म में माथे पर रोली का टीका लगाते है. वहीं इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण जानें तो माथे के इस भाग में दवाब देने से व्यक्ति की बुद्धि में वृद्धि होती है.

इसे माता लक्ष्मी के श्रृंगार का हिस्सा भी माना जाता है. घर के दरवाजे पर लक्ष्मीजी के पैर रोली से बनाये जाते हैं या शुभ और लाभ लिखा जाता है . लक्ष्मी जी सदा सहाय करें. खाता बही और तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रोली से ऐसा लिखा जाना शुभ माना जाता है.

ऐसी मान्यता है कि सरसों के तेल में रोली को मिलाकर दरवाजे पर लगाने से घर और परिवार बुरी नज़र से बचा रहता है. यूँ तो इसका महत्व बहुत है लेकिन यह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है देवी पूजा में चाहे वह दुर्गा जी हों या अन्य कोई भी देवी. नवरात्र में तो रोली के बिना पूजन का होना ही असंभव होता है.

कुमकुम का महत्व अत्यधिक है. बिना इसमें पैर भिगाये कोई भी नई दुल्हन गृह प्रवेश नहीं कर सकती है. आपने भी देखा होगा कि नई बहू के पैर रोली घुले हुए पानी में डुबोने के बाद ही गृह प्रवेश होता है.

धर्म के अनुसार मनुष्य को अपने माथे को सूना नही रखना चाहिए. माथे पर प्रतिदिन रोली का तिलक लगाना चाहिए. धर्म के अनुसार इससे माथे की रौनक बढ़ती है वहीं विज्ञान के अनुसार इससे माथे पर अधिक समय तक ध्यान जाता है जिस कारण दिमाग पर प्रेशर बढ़ता है. इसके बुद्धि में भी वृद्धि होती हैं.

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