जब मैदान पर की गई एक गलती से टूटे थे कई लोगों के दिल, यहाँ देखें वो चूक जो पड़ी थी काफी महंगी

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Cricket: क्रिकेट के खेल में हर एक क्षण का महत्व होता है. मैदान पर टीम द्वारा किए गए अछे या बुरे प्रदर्शन का असर मैच के नतीजे पर पड़ता है. कहा जाता है कि इस खेल में यदि आप विरोधी द्वारा प्रदान किए गए हर मौके का फायदा नहीं उठाते हैं तो आप मुकाबले में पिछड़ जाते हैं.

मैदान पर कोई नहीं जानता कि कब कौन सा पल खेल का रुख मोड़ देगा और इन्हीं पलों को जीतकर एक टीम ने मैच जीता है है जबकि दूसरी टीम को अपनी विफलता पर पछतावा हुआ है.

खिलाड़ियों द्वारा की गई गलती का खामियाजा पूरी टीम भुगतती है और एक चूक कभी-कभी काफी महंगा भी साबित होता है. इस लेख में हम क्रिकेट इतिहास की ऐसी 5 गलतियों पर नज़र डालेंगे जो मैच के सन्दर्भ में काफी महंगी साबित हुई:

तिसारा परेरा का रोहित शर्मा को दिया गया जीवनदान

कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेला गया वह मैच रोहित शर्मा और पूरे भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक पल था. श्रीलंका के खिलाफ खेलते हुए रोहित ने बहुत आसानी से 264 रन जड़ दिए और उन्होंने एक विश्व कीर्तिमान स्थापित किया. लेकिन, उनकी यह पारी काफी पहले ही समाप्त हो जाती अगर थर्ड मैन पर फील्डिंग कर रहे तिसारा परेरा ने उन्हें जीवनदान न दिया होता.

रोहित 4 के स्कोर पर ही आउट हो जाते क्यूंकि एकं गेंद पर रोहित ने विकेट के नीचे आकर छक्का लगाने की कोशिश की थी, लेकिन गेंद ने बल्ले का बाहरी किनारा लिया था और एक आसान कैच परेरा के पास गई, लेकिन वह उसे लपक नहीं पाएं. उसके बाद रोहित पूरी श्रीलंका की टीम पर कहर बनकर बरसे और एक धमाकेदार पारी खेल दी.

गिब्स का जश्न और हाथ से फिसला वर्ल्ड कप

ऑस्ट्रेलिया की टीम करो या मरो की स्थिति में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 1999 विश्व कप में भिड़ी. कंगारुओं ने अपने पिछले दोनों मुकाबले पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाफ गंवाए थे और सुपर सिक्स में आगे बढ़ने के लिए प्रोटियाज को हराने की जरूरत थी. हर्शल गिब्स के शतक ने पहले ही दक्षिण अफ्रीका को एक बेहतर स्थिति में ला दिया था.

ऑस्ट्रेलिया 48-3 से संघर्ष कर रहा था जब स्टीव वॉ बल्लेबाजी के लिए उतरे. जब ऐसा लग रहा था कि उन्होंने अपनी आँखें जमा ली हैं, उसी दौरान स्टीव ने गेंद गिब्स की ओर फ्लिक कर दी. हवा में कैच के लिए जाती गेंद को देखकर गिब्स ने उसे लपका, लेकिन जश्न मनाने की उत्सुकता में कैच पूरा नहीं किया.

दर्शक चकित थे, और वॉ ने उनसे कहा, “क्या आपको एहसास है कि आपने अपनी टीम के लिए कैच के साथ मैच का भी नुकसान किया है? इसके बाद उन्होंने 120 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया को जीत दिला दी.

अश्विन के नो बॉल से सिमंस को मिला मौका

स्पिनर आमतौर पर अपने धीमे और छोटे रन-अप के कारण गेंदबाजी करते समय ओवरस्टेप नहीं करते हैं.लेकिन, भारत के अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने 2016 के टी-20 विश्व कप में किए गए उस एक नो बॉल का खामियाजा भारतीय टीम को मैच गंवाकर चुकाना पड़ा.

यह भारत के प्रमुख स्पिनर की ओर से एक आश्चर्यचकित कर देने वाला दृश्य था क्यूंकि उन्होंने लेंडल सिमंस को आउट तो किया, लेकिन वह स्पष्ट रूप से ओवरस्टेप कर गए.

अंपायर ने फिर ‘नो-बॉल’ का संकेत दिया, और शानदार लय में बल्लेबाजी कर रहे ओपनर सिमंस को जिस गेंद पर आउट होना था, उन्हें एक और मौका मिला. जिसके बाद उन्होंने भारत को गलती करने का कोई मौका नहीं दिया और विंडीज ने भारतीय टीम को वर्ल्ड कप से बाहर का रास्ता दिखाया.

एक DRS से एशेज सीरीज हुई बराबर

क्रिकेट के इतिहास में सबसे प्रसिद्ध हेडिंग्ले टेस्ट मैच में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया आमने-सामने थे. एशेज को बचाने और सीरीज में बने रहने के लिए इंग्लिश टीम के लिए जीत जरुरी थी. फिर हेडिंग्ले में आया यह क्षण खेल के इतिहास के सबसे महान टेस्ट मैचों में से एक में गिना गया. हरफनमौला बेन स्टोक्स ने अपनी मैच बचाने वाली पारी से दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों के मन में अपना नाम दर्ज कराया.

हालाँकि, ऑस्ट्रेलिया को इस बात का हमेशा मलाल रहेगा कि यदि उन्होंने डीआरएस (DRS) को चतुराई से इस्तेमाल किया होता तो वे आसानी से मैच जीत सकते थे. दरअसल, इंग्लैंड 351-9 पर था और सीरीज को 1-1 से बराबर करने के लिए 9 रनों की जरूरत थी. टेलेंडर लीच स्ट्राइक पर थे और पैट कमिंस की यॉर्कर गेंद उनके पैड पर लगी.

अंपायर ने नॉट आउट करार दिया और यह स्पष्ट लग रहा था कि गेंद लेग स्टम्प को मिस कर जाती. लेकिन, ऑस्ट्रेलिया ने उत्सुकता में उस निर्णय की समीक्षा करने का फैसला किया, और अपने सभी डीआरएस रिव्यु गंवा दिए.

अगले ही ओवर में इंग्लैंड को जीत के लिए 2 की जरूरत थी जब स्टोक्स ने नाथन लियोन के खिलाफ स्वीप करने का प्रयास किया. वहां भी गेंद उनके पैड पर लगी और रिप्ले से पता चला कि स्टोक्स स्पष्ट रूप से आउट हो गए थे. अंपायर ने हालांकि उन्हें नॉट आउट करार दिया था और ऑस्ट्रेलिया इसकी समीक्षा भी नहीं कर पाया. यानी कि एक डीआरएस समीक्षा के कारण ऑस्ट्रेलिया को एशेज जीत से वंचित रहना पड़ा.

विश्व कप फाइनल का वो नाटकीय ओवर थ्रो

सबसे हालिया वाक्या हुआ 2019 के वर्ल्ड कप फाइनल में जब नियमों के कारण न्यूजीलैंड का वर्ल्ड कप जीतने का सपना टूट गया. इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ने ग्रुप चरणों और क्वालीफायर में असाधारण प्रदर्शन करने के बाद विश्व कप फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था. न्यूजीलैंड वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचना चाह रहा था और इसके बेहद करीब भी दिख रहा था. लेकिन, तभी ऐसा हुआ जिसने सभी दर्शकों को चौंका दिया.

इंग्लैंड को 3 गेंदों में 9 रनों की जरूरत थी और गुप्टिल का एक थ्रो स्टोक्स के बल्ले से जा लगा और गेंद बाउंड्री तक चली गई. अंपायर कुमार धर्मसेना ने इसे 6 रन का इशारा किया, और जीत से दूर लग रही इंग्लैंड को अब 2 गेंद पर मात्र 3 रन बनाने थे. अंतिम गेंद पर मैच टाई हो गया था. उसके बाद सुपर-ओवर में इंग्लैंड ने बाउंड्री काउंट नियम के कारण जीत हासिल की और पहली बार वर्ल्ड कप का ख़िताब अपने नाम किया.

महान ऑस्ट्रेलियाई अंपायर साइमन टॉफेल ने बाद में बताया कि धर्मसेना ने इंग्लैंड को 5 के बजाय 6 रन देने में गलती की थी. हालाँकि पूरा दोष अंपायर पर डालना अनुचित है, लेकिन इस गलती ने कीवी टीम को विश्व कप की ट्रॉफी से दूर कर दिया.

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