Emergency in Sri Lanka : श्रीलंका में हालात काबू से बाहर ! सिर्फ भारत ने इस तरह बढ़ाया ‘इंसानियत’ वाला हाथ

Emergency in Sri Lanka
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Emergency in Sri Lanka : श्रीलंका (Sri Lanka) के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) ने देश में मौजूदा आर्थिक संकट पर उनके इस्तीफे की मांग को लेकर नाराज प्रदर्शनकारियों द्वारा उनके घर के पास प्रदर्शन करने के एक दिन बाद शनिवार को द्वीप राष्ट्र में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी.

कल देशव्यापी विरोध का आह्वान किया गया है क्योंकि देश खुद को आयात के लिए भुगतान करने में असमर्थ पा रहा है, जिससे ईंधन सहित विभिन्न सामानों की कमी हो रही है. श्रीलंका के आर्थिक संकट के लिए क्रमिक सरकारों द्वारा निर्यात में विविधता न लाने और चाय, वस्त्र और पर्यटन जैसे पारंपरिक सेक्टर्स और आयातित वस्तुओं के उपभोग की संस्कृति पर निर्भर रहने का आरोप लगाया जाता है. इन्हीं सब के खस्तहाल होने के कारण आज देश में ऐसी स्थिति है.

दो अधिकारियों ने शनिवार को एक समाचार एजेंसी को बताया कि कोलंबो ने नई दिल्ली से क्रेडिट लाइन हासिल करने के बाद से पहली बड़ी खाद्य सहायता में श्रीलंका को शीघ्र शिपमेंट के लिए भारतीय व्यापारियों ने 40,000 टन चावल लोड करना शुरू कर दिया है.

2.2 करोड़ की आबादी वाला हिंद महासागर द्वीप राष्ट्र श्रीलंका आवश्यक आयात के लिए भुगतान करने के लिए संघर्ष कर रहा है क्योंकि दो वर्षों में विदेशी मुद्रा भंडार में 70% की गिरावट के कारण मुद्रा अवमूल्यन हुआ और वैश्विक उधारदाताओं से मदद लेने के प्रयास किए गए.

श्रीलंका के आर्थिक संकट में ईंधन की आपूर्ति कम है, खाद्य कीमतें बढ़ रही हैं और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं क्योंकि श्रीलंका की सरकार विदेशी ऋण चुकाने की देश की क्षमता पर चिंताओं के बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ बातचीत की तैयारी कर रही है.

चीन के ऋण जाल में फंस के भी श्रीलंका की आर्थिक कमर टूट सी गई है. हालांकि ऐसे बुरे हालात में भारत ने श्रीलंका की मदद के लिए इंसानियत वाली मदद का हाथ आगे बढ़ाया है.

दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक भारत पिछले महीने ईंधन, भोजन और दवा सहित आवश्यक वस्तुओं की गंभीर कमी को कम करने में मदद करने के लिए $ 1 बिलियन की क्रेडिट लाइन प्रदान करने पर सहमत हुआ था.

चावल के शिपमेंट से कोलंबो को चावल की कीमतें कम करने में मदद मिल सकती है, जो कि एक साल में दोगुनी हो गई है, जिससे अशांति में इजाफा हुआ है.

श्रीलंका सरकार ने मौजूदा आर्थिक संकट को लेकर राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के आवास के पास हिंसक प्रदर्शन को आतंकवाद का कार्य करार दिया और इस घटना के लिए विपक्षी दलों से जुड़े चरमपंथी तत्वों को जिम्मेदार ठहराया.

राजपक्षे के आवास के बाहर गुरुवार को उस समय हिंसक विरोध शुरू हो गया जब सैकड़ों प्रदर्शनकारी वहां जमा हो गए और श्रीलंका में सबसे खराब आर्थिक संकट को दूर करने में विफलता के लिए उनके इस्तीफे की मांग की.

आंदोलन के हिंसक होने से कई लोग घायल हो गए और वाहनों में आग लगा दी गई. राष्ट्रपति के आवास के पास लगे स्टील बैरिकेड को गिराने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारें कीं. घटना के बाद, कई लोगों को गिरफ्तार किया गया और कोलंबो शहर के अधिकांश हिस्सों में कुछ समय के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया.

श्रीलंका में विदेशी मुद्रा की कमी के कारण ईंधन जैसे आवश्यक सामानों की कमी हो गई है।.रसोई गैस, और बिजली कटौती जो दिन में 13 घंटे तक चलती है. सेना और पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच देश की गतिविधियां चलने की जद्दोजहद हो रही है.

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