TATA SUMO: देश की पहली पैसेंजर गाड़ी का नाम 'सूमो' ही क्यों रखा गया?

 
TATA SUMO: देश की पहली पैसेंजर गाड़ी का नाम 'सूमो' ही क्यों रखा गया?

'टाटा मोटर्स' की गाड़ियां पूरी दुनिया में पोपुलर हैं और भारत में तो 'टाटा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री' की गाड़ियों का बोलबाला है। टाटा सूमो की अपने समय की पहली पैसेंजर कार थी जिसे देशभर में पसंद किआ जाने लगा था।

  • टाटा के सबसे पहले ओनर जमशेदजी टाटा अपनी खुद की कार खरीदने वाले पहले भारतीय थे।
  • भारत में बननी वाली सबसे पहली कार 'टाटा इंडिका' थी जिसे टाटा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज द्वारा निर्मित किया गया था
  • 'टाटा मोटर्स' द्वारा निर्मित बड़ी SUV केटेगरी की गाड़ियां कई देशों की पुलिस फोर्स द्वारा इस्तेमाल किया जाता है
  • टाटा के नाम सबसे सस्ती कार 'नैनो' बनाने का रिकॉर्ड है
  • लग्जरी कार कंपनी 'जगुआर' भी 'टाटा मोटर्स' का ही हिस्सा है

TATA SUMO की कहानी :

लगभग एक दशक पहले 'टाटा मोटर्स' ने 'सूमो' नाम की एक प्रीमियम एसयूवी को लॉन्च किया था जिसने ऑटोमोबाइल सेक्टर में आग लगा दी थी, बहुत ही कम समय में 'Tata sumo' बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो गई थी और लोगों के बीच उस समय इस सेग्मेंट की गाड़ी खरीदना उनके रुतबे को दिखलाने जैसा था।

TATA SUMO: देश की पहली पैसेंजर गाड़ी का नाम 'सूमो' ही क्यों रखा गया?
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'टाटा सूमो' का नामकरण :

TATA SUMO: देश की पहली पैसेंजर गाड़ी का नाम 'सूमो' ही क्यों रखा गया?

'Tata motors' की लोकप्रिय कार 'Tata sumo' के नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है।
दरसल यह किस्सा भारत के एक बिजनेसमैन 'सुमंत मूलगोकर' से जुड़ा हुआ है जो 'टाटा मोटर्स' के आर्किटेक और 'टाटा इंजीनियरिंग व लोकोमोटिव' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे, इसके अलावा सुमंत ने 'टाटा स्टील' कंपनी में उपाध्यक्ष और मारुति सुजुकी के साथ गैर कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर काम किया था,बाद में इन्हीं के नाम पर टाटा मोटर्स ने उस समय की अपनी सबसे पॉपुलर कार 'Tata sumo' का नाम रखा था।

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'सुमंत मूलगोकर' और 'टाटा सूमो' :

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सुमंत मूलगोकर ने हमेशा अपनी कंपनी के बारे में सोचा, जितना कंपनी उनपर भरोसा करती थी उससे ज्यादा सुमंत कंपनी की तरक्की के लिए सोचते थे, सुमंत मूलगोकर ने 'टाटा मोटर्स' की तरक्की के लिए कई प्रयास किए।
उनके साथ काम करने वाले लोग बताते हैं कि दोपहर के लंच के वक्त सुमंत कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के साथ लंच ना करके दूर कहीं हाईवे किनारे ढाबे पर ट्रक ड्राइवरों के साथ लंच करने के लिए चले जाते थे, 'सुमंत मूलगोकर' अक्सर ट्रक चालकों से कंपनी की गाड़ियों के बारे में बातचीत कर फीडबैक लेते रहते थे और उनके फीडबैक के अनुसार ही गाड़ियों की प्लानिंग और उसमें सुधार का काम किया करते थे। उनकी इसी जिंदादिली की वज़ह से कंपनी के छोटे से छोटे वर्ग के लोगों में भी 'सुमंत मूलगोकर' बहुत लोकप्रिय बन गए थे।

यूँ तो 'टाटा सूमो' की लॉन्चिंग इस किस्से के कई सालों बाद हुई थी मगर उस समय गाड़ी के नामकरण की बात पर 'Tata motors' ने 'सुमंत मूलगोकर' की ईमानदारी और कंपनी के लिए उनके योगदान को याद करते हुए उनको श्रद्धांजलि के तौर पर गाड़ी का नाम उनके सरनेम के पहले 2 अक्षरों को मिलाकर' सूमो' रखने का फैसला किया, इस वजह से टाटा की सबसे लोकप्रिय कार का नाम 'Tata sumo' पड़ा।

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