कोच्चि ₹25 करोड़ ट्रेडिंग स्कैम: कई राज्यों में फैले साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की आशंका, जांच तेज

 
Kochi Trading Scam

कोच्चि सिटी पुलिस द्वारा जांच किए जा रहे ₹25 करोड़ के ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले ने अब एक बड़े साइबर फ्रॉड और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का रूप ले लिया है। जांच एजेंसियां अब इस मामले को केवल एक निवेश धोखाधड़ी नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैले संगठित वित्तीय अपराध के तौर पर देख रही हैं।


यह मामला एक कोच्चि-आधारित व्यवसायी से जुड़ा है, जिसने कथित तौर पर एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लगभग ₹25 करोड़ गंवा दिए। आरोप है कि निवेशक को विदेशी ट्रेडिंग, डिजिटल एसेट्स और हाई-रिटर्न इन्वेस्टमेंट के नाम पर भारी मुनाफे का लालच दिया गया था। जांचकर्ताओं के अनुसार, पूरा सिस्टम बेहद पेशेवर तरीके से तैयार किया गया था ताकि यह एक वैध अंतरराष्ट्रीय निवेश कंपनी जैसा दिखाई दे।

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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में निवेशक को फर्जी प्रॉफिट और ट्रेडिंग ग्राफ दिखाए गए, जिससे उसका भरोसा बढ़ा। इसके बाद धीरे-धीरे उससे बड़ी रकम निवेश करवाई गई। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह के फ्रॉड में पहले छोटे लाभ दिखाकर पीड़ित को मानसिक रूप से भरोसे में लिया जाता है और फिर उससे करोड़ों रुपये तक निवेश करवाए जाते हैं।


मामले की जांच तब तेज हुई जब कोच्चि साइबर पुलिस ने कई बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन्स की जांच शुरू की। लंबी वित्तीय पड़ताल और निगरानी के बाद हैदराबाद से दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब दोनों आरोपियों की कस्टडी मांग रही है ताकि उनसे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और पैसों के ट्रेल का पता लगाया जा सके।


जांच एजेंसियों को आशंका है कि ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा अलग-अलग कंपनियों और बिजनेस वेंचर्स के जरिए घुमाया गया। पुलिस अब निर्माण परियोजनाओं, आईटी कंपनियों, लग्जरी एसेट्स और अन्य व्यवसायों में किए गए निवेशों की जांच कर रही है। अधिकारियों को शक है कि इन कारोबारों का इस्तेमाल कथित तौर पर फ्रॉड के पैसों को वैध दिखाने के लिए किया गया हो सकता है।


सूत्रों का कहना है कि आरोपी कई व्यवसायों का संचालन कर रहे थे और खुद को सफल कारोबारी के रूप में प्रस्तुत करते थे। जांचकर्ताओं का मानना है कि इसी छवि का इस्तेमाल संभावित निवेशकों का भरोसा जीतने में किया गया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इसी मॉडल के जरिए अन्य राज्यों में भी लोगों को निशाना बनाया गया।


यह मामला देशभर में तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश फ्रॉड्स को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे गिरोह अब अत्याधुनिक वेबसाइट्स, फर्जी कस्टमर सपोर्ट टीम, सोशल मीडिया विज्ञापनों और नकली ट्रेडिंग डैशबोर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि लोगों को भरोसा दिलाया जा सके कि उनका पैसा सुरक्षित और तेजी से बढ़ रहा है।


अक्सर इन प्लेटफॉर्म्स पर निवेशकों को शुरुआती दौर में नकली मुनाफा दिखाया जाता है। जब निवेशक का विश्वास मजबूत हो जाता है, तब उसे और बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। लेकिन जब पैसा निकालने की कोशिश की जाती है, तब टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी जाती है या फिर प्लेटफॉर्म अचानक संपर्क बंद कर देता है।


कोच्चि पुलिस को आशंका है कि इस पूरे ऑपरेशन में डिजिटल पेमेंट नेटवर्क, बैंकिंग चैनल्स और साइबर टेक्नोलॉजी की अच्छी समझ रखने वाले लोगों का संगठित समूह शामिल हो सकता है। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या फर्जी बैंक खाते, शेल कंपनियां और प्रॉक्सी एंटिटीज का इस्तेमाल पैसों को तेजी से इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया गया।


इकोनॉमिक ऑफेंसेज और साइबर क्राइम टीमें फिलहाल बैंक रिकॉर्ड्स, डिजिटल कम्युनिकेशन, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और तकनीकी डेटा की गहन फॉरेंसिक जांच कर रही हैं। अधिकारियों की नजर इस बात पर भी है कि कहीं इस कथित फ्रॉड में विदेशी लिंक या ऑफशोर नेटवर्क तो शामिल नहीं थे।


पुलिस सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इसी प्लेटफॉर्म या उससे जुड़े अन्य नामों के जरिए और लोगों को भी निशाना बनाया गया था।
केरल में किसी एक साइबर ट्रेडिंग फ्रॉड शिकायत में इतनी बड़ी रकम सामने आने के कारण यह मामला कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण बन गया है। वरिष्ठ अधिकारी इसे एक बड़े वित्तीय अपराध नेटवर्क के तौर पर देख रहे हैं, जिसके तार राज्य से बाहर तक फैले हो सकते हैं।


साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने निवेशकों को चेतावनी दी है कि वे किसी भी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता और नियामकीय स्वीकृतियों की पूरी जांच करें। विशेषज्ञों का कहना है कि अवास्तविक मुनाफे के वादों, सोशल मीडिया के जरिए मिलने वाले निवेश प्रस्तावों और लगातार दबाव डालने वाले कॉल्स से सावधान रहना बेहद जरूरी है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, पुलिस का फोकस अब पूरे नेटवर्क का खुलासा करने, गायब पैसों का पता लगाने और इस कथित ऑपरेशन से लाभ उठाने वाले सभी लोगों की पहचान करने पर है। आरोपियों से होने वाली पूछताछ इस बात का खुलासा कर सकती है कि आखिर ₹25 करोड़ का यह कथित ट्रेडिंग फ्रॉड किस तरह अंजाम दिया गया और पैसे आखिर कहां गए।

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