रिवोली पार्क को लेकर सवाल: धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे रोहन खटाऊ के मेगा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट से बड़ी एजेंसियां क्यों बना रही हैं दूरी?

 
रोहन खटाऊ रिवोली पार्क

व्यवसायी रोहन खटाऊ से जुड़े एक बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) उनके खिलाफ दर्ज एक कथित धोखाधड़ी मामले की जांच कर रही है।
केबल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) से जुड़े रोहन खटाऊ का नाम वर्ष 2024 में दर्ज लगभग ₹14.23 करोड़ के कथित फ्रॉड केस में सामने आया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, रोहन खटाऊ, हितेन खटाऊ और कंपनी के अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायत एक मुंबई स्थित केबल और वायर सप्लायर द्वारा की गई थी।


जांच जारी रहने के बावजूद, रोहन खटाऊ रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी से विस्तार करते नजर आ रहे हैं। रिवोली पार्क समेत कई प्रोजेक्ट्स CCI Projects Pvt Ltd से जुड़े बताए जा रहे हैं। सार्वजनिक दस्तावेजों में रोहन हितेन खटाऊ का नाम परियोजना से जुड़े निदेशक के रूप में सामने आया है।

WhatsApp Group Join Now


इसी बीच, उद्योग जगत में यह सवाल उठने लगे हैं कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के बावजूद प्रमुख संस्थागत एजेंसियां, बड़े निवेशक और नामी रियल एस्टेट पार्टनर्स सार्वजनिक रूप से इस परियोजना के साथ नजर क्यों नहीं आ रहे हैं।
मार्केट से जुड़े जानकारों का मानना है कि इसकी बड़ी वजह चल रही कानूनी जांच और उससे जुड़ा प्रतिष्ठा संबंधी जोखिम हो सकता है। मुंबई के प्रतिस्पर्धी रियल एस्टेट बाजार में इस स्तर की परियोजनाओं को आमतौर पर बड़े निवेशकों, फाइनेंसिंग पार्टनर्स और ब्रांड सहयोग का समर्थन मिलता है। लेकिन रिवोली पार्क को लेकर ऐसी सार्वजनिक भागीदारी का अभाव अब चर्चा का विषय बनता जा रहा है।


शिकायत में कथित तौर पर आरोप लगाया गया था कि फरवरी से जून 2022 के बीच CCI को ₹14.23 करोड़ मूल्य का माल सप्लाई किया गया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि भुगतान और व्यापारिक रिकवरी के आश्वासन दिए गए, लेकिन बाद में भुगतान नहीं किया गया।


वहीं, रोहन खटाऊ सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि वे पारंपरिक केबल कारोबार से आगे बढ़कर रियल एस्टेट क्षेत्र में नई पहचान बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और किसी अदालत द्वारा अभी तक दोष सिद्ध नहीं किया गया है। हालांकि, कानूनी जांच की वजह से इस महत्वाकांक्षी रियल एस्टेट विस्तार पर सवाल उठ रहे हैं और उद्योग जगत की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह विवाद भविष्य में खरीदारों के भरोसे और कारोबारी साझेदारियों को प्रभावित करेगा।

Tags

Share this story