विकास मानकतला: कैडेट हूडा से स्पेशल एजेंट अभय तक – एक सफ़र जिसमें हैं एक्शन, इमोशन और भक्ति
“जब आप किरदार में होते हैं, तब आप अपने असली ‘विकास’ को पीछे छोड़ देते हैं। तभी आप उसे सचमुच जी पाते हैं।” – विकास मानकतला
अभय बनने की तैयारी – सिर्फ़ बॉडी नहीं, दिमाग़ भी
स्पेशल ऑप्स 2 में अभय के किरदार के लिए विकास ने जमकर मेहनत की। वे बताते हैं, “हर किरदार का अपना सफ़र और माइंडसेट होता है। अगर आप उसे समझ लेते हैं तो सफ़र आसान हो जाता है।”
फिटनेस के लिए उन्होंने 10.5 किलो वज़न बढ़ाया और फिर मार्शल आर्ट्स, हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट, वेपन ट्रेनिंग से लेकर फ्लेक्सिबिलिटी तक हर चीज़ पर काम किया। “फिज़िकली मेहनत की, लेकिन असली क्रेडिट नीरज सर और टीम को जाता है जिन्होंने अभय को गढ़ा।”

19 साल बाद भी हूडा का क्रेज़
लेफ़्ट राइट लेफ़्ट आज भी दर्शकों के दिलों में बसा है। “19 साल हो गए, लेकिन रोज़ मुझे मैसेज, लेटर्स और डीएम आते हैं। जब स्पेशल ऑप्स 2 का ट्रेलर आया तो सबने कहा – कैडेट हूडा अब स्पेशल एजेंट बन गया है। वो प्यार असली और सच्चा है।”
और ये फैनडम उस दौर का है जब सोशल मीडिया नहीं था। विकास मुस्कुराते हुए कहते हैं, “तब असली फैनडम होता था – खून से लिखे खत, लिपस्टिक के निशान, कपड़े… ऐसी दीवानगी अब कम देखने को मिलती है।”
संघर्ष और भक्ति का सहारा
विकास ने कई बार स्क्रीन से लंबा ब्रेक लिया। “लोग क्या कहेंगे, इससे मैंने हमेशा दूरी बनाई। लेकिन हाँ, इन ब्रेक्स में डिप्रेशन और एंग्ज़ायटी भी आई।”
उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बना भोलेनाथ से जुड़ाव। “शिव से गहरा कनेक्शन ही मुझे बार-बार बचाता रहा। जब आप सचमुच समर्पण कर देते हैं, तो भीतर से एक अद्भुत ऊर्जा बहने लगती है।”
ग़ुस्सा और बिग बॉस
बिग बॉस में ग़ुस्से वाले टैग पर वे साफ़ कहते हैं, “पूरी कहानी कभी नहीं दिखाई जाती। दिन में दस इमोशंस आते हैं, लेकिन टीवी पर सिर्फ़ 2-3 हाइलाइट होते हैं। ग़ुस्सा बिकता है, इसलिए वही दिखता है।”
लेकिन उनके लिए ग़ुस्से का मतलब अलग है। “असल सवाल ये नहीं कि ग़ुस्सा क्यों आया, बल्कि ये है कि आप उसमें कितनी देर तक फंसे रहते हैं। ज़रूरी है कि उस ग़ुस्से को प्यार और शांति में बदलो।”

गुनजन – ताक़त और साथी
अपनी पत्नी गुनजन के बारे में विकास की आवाज़ नरम पड़ जाती है। “वो मेरी सबसे बड़ी ताक़त हैं। मुश्किल वक़्त में साथ निभाना आसान नहीं होता, लेकिन गुनजन हमेशा मेरे साथ खड़ी रहीं। मैं वाक़ई बहुत भाग्यशाली हूँ।”
उनकी मुलाक़ात पहले प्रोफेशनल मीटिंग में हुई, फिर एक दिन जिम से लौटते वक़्त बाज़ार में अचानक मुलाक़ात हुई। “गुनजन कहती हैं कि जब हम मिले तो ट्रैफिक भी स्लो मोशन में चलने लगा था,” विकास हँसते हुए याद करते हैं।
हूडा वही है, बस और गहरा हो गया
कैडेट हूडा से लेकर एजेंट अभय तक, विकास का मंत्रा एक ही रहा है – किरदार को ईमानदारी से निभाना। “जब आप किरदार में होते हैं, तभी वो सच्चा लगता है। और शायद यही वजह है कि 19 साल बाद भी लोग उतना ही प्यार दे रहे हैं।”