उत्तराखंड में मानसून का कहर: बद्रीनाथ हाईवे डूबा, चमोली में बादल फटा, कई जिले प्रभावित
रुद्रप्रयाग और आसपास के जिलों में मानसून की भारी बारिश कहर बनकर टूटी है। बद्रीनाथ हाईवे पर सिरोबगड़ के पास अलकनंदा नदी का पानी मिनी गोवा बीच से होकर सीधे नेशनल हाईवे पर आ गया। इस वजह से यातायात पूरी तरह ठप हो गया। 2013 की आपदा के बाद यह नजारा पहली बार देखने को मिला है। अलकनंदा नदी का उफान इतना ज्यादा है कि पानी मां धारी देवी मंदिर तक पहुंच गया है।
भीमताल मार्ग पर रानीबाग के पास पुल पर भारी मलबा आने से सड़क बंद हो गई। प्रशासन ने जेसीबी मशीन लगाकर मलबा हटाने का काम शुरू किया। वहीं उत्तरकाशी के गंगोत्री हाईवे पर भी तेज बारिश के चलते पापड़ गाड़ में पानी और मलबा आ जाने से पुल को नुकसान हुआ। बीआरओ की मशीनें और वाहन भी इसकी चपेट में आ गए।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल उत्तराखंड में अब तक 1075 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो औसत से 15% ज्यादा है।
सबसे भयावह स्थिति चमोली जिले में सामने आई, जहां मोपाटा गांव में बादल फट गया। देर रात हुई इस आपदा में दो लोग लापता हैं और दो गंभीर रूप से घायल। ग्रामीणों के अनुसार, मवेशी और कई मकान मलबे में दब गए। प्रशासन और SDRF की टीमें राहत व बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
रुद्रप्रयाग और आसपास के जिलों में मानसून की भारी बारिश कहर बनकर टूटी है। बद्रीनाथ हाईवे पर सिरोबगड़ के पास अलकनंदा नदी का पानी मिनी गोवा बीच से होकर सीधे नेशनल हाईवे पर आ गया। इस वजह से यातायात पूरी तरह ठप हो गया। 2013 की आपदा के बाद यह नजारा पहली बार देखने को मिला है। अलकनंदा नदी का उफान इतना ज्यादा है कि पानी मां धारी देवी मंदिर तक पहुंच गया है।
भीमताल मार्ग पर रानीबाग के पास पुल पर भारी मलबा आने से सड़क बंद हो गई। प्रशासन ने जेसीबी मशीन लगाकर मलबा हटाने का काम शुरू किया। वहीं उत्तरकाशी के गंगोत्री हाईवे पर भी तेज बारिश के चलते पापड़ गाड़ में पानी और मलबा आ जाने से पुल को नुकसान हुआ। बीआरओ की मशीनें और वाहन भी इसकी चपेट में आ गए।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल उत्तराखंड में अब तक 1075 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो औसत से 15% ज्यादा है।
सबसे भयावह स्थिति चमोली जिले में सामने आई, जहां मोपाटा गांव में बादल फट गया। देर रात हुई इस आपदा में दो लोग लापता हैं और दो गंभीर रूप से घायल। ग्रामीणों के अनुसार, मवेशी और कई मकान मलबे में दब गए। प्रशासन और SDRF की टीमें राहत व बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।