CGHS की नई व्यवस्था से पेंशनर्स में नाराज़गी, मंत्रालय से तुरंत हस्तक्षेप की मांग
16 मई 2025 को पेंशनर्स फोरम (Pensioner's Forum) ने स्वास्थ्य मंत्रालय की सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव को एक पत्र भेजकर CGHS की नई दवा रीइम्बर्समेंट नीति पर नाराज़गी जताई। संगठन ने 9 मई 2025 को जारी आदेश को "रेट्रोग्रेड" बताते हुए कहा कि यह बुज़ुर्ग मरीजों को निजी बाजार से महंगी जीवनरक्षक दवाएं खरीदने के लिए मजबूर करता है और फिर उनसे रीइम्बर्समेंट की उम्मीद करता है, जो समय पर इलाज में बाधा बन सकता है।
फोरम के महासचिव आनंद अवस्थी ने चेतावनी दी कि अगर मंत्रालय ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया, तो वे सख्त कदम उठाने को मजबूर होंगे।
वहीं, सरकार की ओर से जारी ऑफिस मेमो में यह स्पष्ट किया गया है कि 28 अप्रैल से 31 मई 2025 तक, CGHS लाभार्थियों को "वैलिड प्रिस्क्रिप्शन" के आधार पर एक माह तक खुले बाजार से दवाएं खरीदने की अनुमति दी गई है। यह प्रावधान HMIS सिस्टम के NIC से C-DAC प्लेटफॉर्म पर माइग्रेशन के कारण हुई परेशानियों को देखते हुए अस्थायी रूप से लागू किया गया है।
हालांकि पेंशनर्स का कहना है कि यह समाधान अधूरा और असंवेदनशील है, जिससे दवा मिलने में देरी और जान का जोखिम बना हुआ है।