Delhi: संयुक्त राष्ट्र ने भारत के इंजीनियरिंग छात्रों की प्रशंसा की, सॉफ्टवेयर को मिली ये मान्यता

 

नई दिल्ली : सॉफ्टवेयर उद्योग के वालेंटियरों और भारत के होनहार इंजीनियरिंग छात्रों ने संयुक्त तौर पर विकसित कोरोनासेफ नेटवर्क (https://coronasafe.network/) नामक ओपन-सोर्स पैंडेमिक मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर सोल्युशन को अंतरराष्ट्रीय जगत से प्रशंसा मिली है. इस सॉफ्टवेयर को संयुक्त राष्ट्र ने ग्लोबल डिजिटल पब्लिक गुड के रूप में मान्यता दी है.

वहीं एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो अनिल डी सहस्रबुद्धे ने कहा है कि इस ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर का रखरखाव भारतीय इंजीनियरिंग छात्रों द्वारा सक्रिय रूप से किया जाता है, और यह ओपन डेटा, ओपन एआई मॉडल, ओपन स्टैंडर्ड्स जैसे सभी वैश्विक तकनीकी मानकों का पालन करता है और गोपनीयता और अन्य लागू सर्वोत्तम प्रथाओं का पालन करने के लिए संयुक्त राष्ट्र से प्रशंसा पाना एआईसीटीई के लिए गर्व की बात है'.

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एआईसीटीई के उपाध्यक्ष प्रोफेसर एमपी पूनिया ने कहा कि 'परिषद यह जानकर बहुत खुश है कि भारतीय इंजीनियरिंग छात्रों के एक ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर ने सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा किया है. मेरा दृढ़ विश्वास है कि युवा भारतीय दिमाग भविष्य में तकनीकी क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा.

छात्रों को किया गया था प्रशिक्षित

छात्रों को शिक्षा मंत्रालय के नेशनल एजुकेशनल एलायंस फॉर टेक्नोलॉजी (एनईएटी) कार्यक्रम के सदस्य, Pupilfirst.org द्वारा प्रशिक्षित किया गया था और इन्हें भारत के SaaS उद्योग के लीडर्स फ्रेशवर्क्स के साथ बनाए गए आधुनिक शिक्षण-प्रशिक्षण प्रक्रियाओं और उन्नत उद्योग पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था.
इंजीनियरिंग के छात्र अब टेलीआईसीयू सुविधाओं के निर्माण के लिए ई-गवर्नेंस फाउंडेशन के साथ काम कर रहे हैं,

आधार के संस्थापक सीटीओ और ई-गवर्नेंस फाउंडेशन के ट्रस्टी श्री श्रीकांत नधामुनि ने कहा कि 'कोरोनासेफ को एक डिजिटल सार्वजनिक वस्तु के रूप में मान्यता देकर, संयुक्त राष्ट्र राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर इसे अपनाने का समर्थन कर रहा है. आपको बता दें कि डिजिटल पब्लिक गुड्स एलायंस के सचिवालय की सह-मेजबानी नॉर्वेजियन एजेंसी फॉर डेवलपमेंट कोऑपरेशन (नोराड) और यूनिसेफ द्वारा की जाती है.

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