कौन है हरी शंकर तिबरेवाला? हवाला से शेयर बाज़ार हिलाने वाला मास्टरमाइंड
नई दिल्ली: शेयर बाज़ार में अचानक आई हलचल, छोटे निवेशकों का डूबा पैसा और ईडी की बड़ी छापेमारी—इन सबके बीच एक नाम तेजी से सुर्खियों में आया है: हरी शंकर तिबरेवाला।
कोलकाता से निकलकर दुबई तक फैली तिबरेवाला की गाथा किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। लेकिन यह कहानी है हवाला, ब्लैक मनी और शेयर बाज़ार को हिलाने वाले खेल की।
कोलकाता से दुबई तक का सफ़र
हरी शंकर तिबरेवाला का जन्म कोलकाता में एक मारवाड़ी परिवार में हुआ। शुरुआती कारोबार सामान्य था, लेकिन 90 के दशक के अंत तक उन्होंने हवाला रूट से पैसा भेजने-लाने का धंधा पकड़ लिया। धीरे-धीरे उनकी पहुंच दुबई, सिंगापुर और मॉरीशस तक बन गई।
दुबई उनके साम्राज्य का मुख्य अड्डा बना—जहां से वे न सिर्फ़ हवाला ऑपरेट करते रहे, बल्कि महादेव ऑनलाइन बुक जैसे सट्टेबाज़ी नेटवर्क के प्रमोटरों से हाथ मिलाकर करोड़ों का खेल खड़ा कर दिया।
हवाला का जाल और महादेव ऑनलाइन बुक
महादेव ऑनलाइन बुक, जिसे ‘सट्टेबाज़ी का वर्चुअल अड्डा’ कहा जाता है, का संचालन दुबई से होता है। तिबरेवाला ने इस प्लेटफ़ॉर्म के पैसों को हवाला चैनलों से भारत लाकर शेयर बाज़ार में निवेश करवाया।
ईडी की रिपोर्ट बताती है कि ₹580 करोड़ से अधिक की रकम तिबरेवाला से जुड़ी कंपनियों में पाई गई और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के नाम पर ₹606 करोड़ तक लगाए गए। यह रकम केवल कागज़ पर निवेश लगती थी, असल में यह सट्टेबाज़ी का काला धन था।