आईआईटी कानपुर ने बनाई पोर्टेबल डिवाइस, मिनटों में होगी मलेरिया की जांच

 
आईआईटी कानपुर ने बनाई पोर्टेबल डिवाइस, मिनटों में होगी मलेरिया की जांच

कानपुर। आईआईटी कानपुर के बायोसाइंस और बायो इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अभिनव डिवाइस तैयार की है, जो रक्त, मूत्र, लार और पसीने से मलेरिया समेत कई रोगों की तुरंत जांच करने में सक्षम है। यह पोर्टेबल डिवाइस ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी मौके पर ही जांच करने की सुविधा देगी और तत्काल रिपोर्ट उपलब्ध कराएगी।

करीब ढाई हजार रुपये की लागत से तैयार इस डिवाइस में पेपर-आधारित चिप का उपयोग किया जाता है। इससे जांच बेहद सस्ती और आसान हो जाती है। इसके अलावा इस डिवाइस का इस्तेमाल मिट्टी में प्रदूषण और दूध या पेय पदार्थों की गुणवत्ता जांचने में भी किया जा सकता है।

तुरंत और सटीक रिपोर्ट

पारंपरिक पैथोलॉजी जांचों में घंटों से लेकर दिनों तक इंतजार करना पड़ता है, लेकिन इस नई डिवाइस से नतीजे तुरंत मिल जाते हैं। इससे नमूनों के दूषित या खराब होने का खतरा भी खत्म हो जाता है। यह डिवाइस छोटी और हल्की होने के कारण आसानी से कहीं भी ले जाई जा सकती है।

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शोधकर्ताओं ने दिया नया नाम

प्रोफेसर संतोष कुमार मिश्र के मार्गदर्शन में शोधार्थी अनिमेष कुमार सोनी और नेहा यादव ने इस डिवाइस को विकसित किया है। इसका नाम “पोर्टेबल रीडआउट यूनिट फॉर केमिरसिस्टव सेंसर” रखा गया है। इसके लिए पेटेंट आवेदन भी स्वीकृत हो चुका है। प्रत्येक जांच के लिए अलग-अलग पेपर चिप और डिवाइस का प्रयोग होगा, जिसकी लागत केवल 15 से 20 रुपये होगी।

स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में उपयोग

विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिवाइस से स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। डॉक्टर अपने क्लिनिक में इसे रखकर तुरंत जांच रिपोर्ट प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा खेतों की मिट्टी, पानी, दूध और अन्य पेय पदार्थों में रसायन की जांच भी संभव होगी। आईआईटी कानपुर इस तकनीक को बाजार तक पहुंचाने के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर काम कर रहा है।

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