IL&FS मनी लॉन्ड्रिंग: ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट में ₹2,364 करोड़ की गड़बड़ी का खुलासा
नई दिल्ली, IL&FS फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (IFIN) से जुड़े ₹2,364 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। यह आंकड़ा ग्रांट थॉर्नटन द्वारा की गई फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है, जो 20 फरवरी को IL&FS के नए बोर्ड को सौंपी गई थी।
जांच में सामने आया है कि IFIN द्वारा जिन उधारकर्ताओं को लोन दिया गया था, उन्होंने वह पैसा IL&FS की ग्रुप कंपनियों (खासकर ITNL) को ट्रांसफर कर दिया। 11 सितंबर 2018 की बोर्ड मीटिंग के अप्रमाणिक मिनट्स के अनुसार, उस समय के बोर्ड सदस्य इस बात से अवगत थे कि लोन लेने वाली कंपनियां यह रकम आगे IL&FS की कंपनियों को दे रही हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि करीब ₹2,270 करोड़ की राशि तीसरी कंपनियों से होते हुए IL&FS ग्रुप की कंपनियों के पास पहुंचाई गई। इसमें सबसे ज़्यादा ITNL को ₹1,150 करोड़, श्रीनगर सोनमर्ग टनलवे को ₹390 करोड़, गुजरात मरीन कॉम्प्लेक्स को ₹250 करोड़, फगने-सोंगार्ड एक्सप्रेसवे को ₹200 करोड़ और चेन्नई-नशरी टनल को ₹150 करोड़ मिले। वहीं सी लैंड पोर्ट और सीतार बिकानेर को क्रमश: ₹100 करोड़ और ₹30 करोड़ मिले।
जांच में यह भी सामने आया है कि छह मामलों में ₹100 करोड़ से अधिक के लोन सीधे प्रमोटर्स या डायरेक्टर्स को ट्रांसफर किए गए। उदाहरण के तौर पर, IFIN ने गेटवे डिस्ट्रीपार्क्स को ₹25 करोड़ का लोन दिया, जिसमें से प्रिज़्म इंटरनेशनल को फंड ट्रांसफर हुआ और वहां से प्रमोटर प्रेम किशन गुप्ता को ₹7.5 करोड़ मिले।
इसी तरह, प्रिज़्म को अक्टूबर 2017 में ₹75 करोड़ दिए गए, जिनमें से बड़ी रकम गुप्ता को ट्रांसफर हुई। फलेमिंगो ग्रुप को ₹514.50 करोड़ का लोन दिया गया, जिसमें से डायरेक्टर कबीर और विरन आहूजा को ₹8.81 करोड़ प्राप्त हुए।
IL&FS एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी के डायरेक्टर को भी ₹2.95 करोड़ ट्रांसफर किए गए। बे कैपिटल के प्रमोटर सिद्धार्थ दिनेश मेहता को इंडस इक्वीकैप कंसल्टेंसी प्रा. लि. के ज़रिए लोन मिला।
ED इन सभी लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है और अब तक दो मुख्य मनी लॉन्ड्रिंग के केस की पहचान हो चुकी है।