भारत को मिलेगा मल्टी-लेयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम, कुशा परियोजना पर काम तेज

 
भारत को मिलेगा मल्टी-लेयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम, कुशा परियोजना पर काम तेज

कानपुर। आने वाले वर्षों में भारत की रक्षा प्रणाली को और अधिक मज़बूत करने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) बड़े स्तर पर काम कर रहा है। डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के 40वें दीक्षांत समारोह में बताया कि वर्ष 2028 तक देश को अत्याधुनिक मल्टी लेयर एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम “कुशा” मिलने जा रहा है।

यह प्रणाली लंबी, मध्यम और निकट दूरी तक दुश्मनों के हवाई हमलों को रोकने और उन्हें हवा में ही नष्ट करने में सक्षम होगी। उन्नत राडार तकनीक से लैस यह सिस्टम 300 से 400 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के लक्ष्यों को पहचान सकेगा।

डॉ. कामत ने कहा कि संगठन स्वदेशी ड्रोन और यूएवी (Unmanned Aerial Vehicle) तकनीक के विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है। आने वाले समय में भारत के पास कई घरेलू ड्रोन होंगे जो सुरक्षा और निगरानी में कारगर साबित होंगे।

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साइबर सुरक्षा की चुनौती

डीआरडीओ प्रमुख ने चेताया कि मौजूदा समय में देश साइबर अटैक्स की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। हर दिन लाखों साइबर हमले हो रहे हैं, जिनमें आम नागरिक और संस्थान निशाना बनते हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम साइबर योद्धा तैयार करें और छात्रों को बड़े पैमाने पर साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण दें।

भविष्य के हथियार और ऑपरेशन सिंदूर

डॉ. कामत ने यह भी बताया कि 2028 तक भारत हाइपरसोनिक मिसाइल और लेज़र-आधारित हथियारों से लैस होगा। हाइपरसोनिक मिसाइल को इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन होता है और यह भारत की सैन्य क्षमता को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। लेज़र हथियार भी सेनाओं को और ताकतवर बनाएंगे।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय हथियारों के प्रदर्शन का विशेष उल्लेख किया। इस दौरान आकाश सिस्टम, एयर डिफेंस सिस्टम, ब्रह्मोस (ऑफेंसिव मोड), डी-4 एंटी-ड्रोन सिस्टम और यूएवी ने अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया और भारतीय तकनीक की मजबूती दुनिया के सामने रखी।

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