सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: 498A मामलों में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक, परिवार कल्याण समिति करेगी जांच
नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 498A (क्रूरता के अपराध) के दुरुपयोग को रोकने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सुझाए गए सुरक्षा उपायों को हरी झंडी दे दी है।
प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा 13 जून 2022 को जारी दिशानिर्देश प्रभावी रहेंगे और सभी संबंधित प्रशासनिक प्राधिकरणों को इन्हें लागू करना होगा।
498A के गलत इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
हाल के वर्षों में सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार चिंता जताई है कि धारा 498A का इस्तेमाल कई मामलों में प्रताड़ना से ज्यादा “बदले की भावना” या “गलत मकसद” से किया गया है। अक्सर पत्नियां पति और पूरे ससुराल पक्ष के खिलाफ झूठे आरोप लगाकर उन्हें फंसाने की कोशिश करती हैं।
हाईकोर्ट का समाधान: 'परिवार कल्याण समिति'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2022 के फैसले में सोशल एक्शन फोरम फॉर ह्यूमन राइट्स बनाम भारत सरकार के सुप्रीम कोर्ट आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि धारा 498A के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए “परिवार कल्याण समिति” (Family Welfare Committee) का गठन किया जाए।
हाईकोर्ट के मुताबिक, जब किसी महिला की शिकायत पर FIR दर्ज होती है, तब उसमें शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी “कूलिंग पीरियड” (दो महीने) पूरा होने से पहले नहीं की जानी चाहिए। इस अवधि में मामला परिवार कल्याण समिति को भेजा जाएगा, जो जांच करके रिपोर्ट देगी।
क्या है “कूलिंग पीरियड”?
FIR दर्ज होने के बाद दो महीने तक आरोपी पक्ष को गिरफ्तारी से राहत मिलेगी। इस दौरान परिवार कल्याण समिति समझौता कराने, सच्चाई जानने और उचित सिफारिश देने का काम करेगी।