कानपुर में गंगा का कहर: 10 से अधिक गांव जलमग्न, सड़कों पर शरण लिए ग्रामीण

 
कानपुर में गंगा का कहर: 10 से अधिक गांव जलमग्न, सड़कों पर शरण लिए ग्रामीण

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में गंगा का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। दो दिन पहले हालात अचानक बिगड़ने से गंगा का पानी बैराज से निकलकर निचले इलाकों में घुस गया। भगवानदीनपुरवा, हिंदूपुर, गिल्लीपुरवा और डल्लापुरवा समेत 10 से अधिक गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए। हजारों ग्रामीण अपने घर, खेत और सामान छोड़कर गंगा बैराज मार्ग और ऊंची सड़कों पर तिरपाल और टेंट लगाकर शरण लेने को मजबूर हैं।

पलायन और दयनीय हालात

तेजी से पानी घुसने के कारण ग्रामीणों को गृहस्थी तक समेटने का मौका नहीं मिला। मवेशियों को भी लोग साथ लेकर ऊंचे स्थानों पर पहुंचे। खुले आसमान के नीचे महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग दिन-रात गुजार रहे हैं। दिन में धूप और रात में मच्छरों के कारण परेशानियां और बढ़ गई हैं।

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राहत का इंतजार

प्रभावित परिवार भूख-प्यास से बेहाल हैं। समाजसेवी संस्थाएं राहत शिविर लगाकर भोजन वितरित कर रही हैं, लेकिन वह हर किसी तक नहीं पहुंच पा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक मदद न मिलने से हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं।

खतरनाक जलस्तर

सिंचाई विभाग के अनुसार गंगा बैराज का जलस्तर इस समय 115 मीटर तक पहुंच गया है, जो बेहद खतरनाक माना जाता है। शुक्लागंज में गंगा का खतरे का निशान 113 मीटर है जबकि मौजूदा स्तर 113.230 मीटर दर्ज हुआ है।

ग्रामीणों की आपबीती

स्थानीय लोगों ने बताया कि खेत और घर पूरी तरह डूब चुके हैं। मवेशियों के लिए चारा तक पानी में बह गया। कुछ लोगों को लगातार दो दिन तक बिना भोजन रहना पड़ा। साथ ही बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है क्योंकि पीने के पानी और दवाओं की भारी कमी है।

प्रशासन से उम्मीद

ग्रामीण अब जिला प्रशासन से राहत सामग्री, दवाएं और सुरक्षित आश्रय की मांग कर रहे हैं। सिंचाई विभाग की टीमें हालात पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन पानी घटने के आसार अभी नहीं दिख रहे।

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