कानपुर: सिक्योरिटी गार्ड को मिला 3.14 करोड़ रुपये का CGST नोटिस, 17 करोड़ के कारोबार का दावा
कानपुर — नौबस्ता थाना क्षेत्र के हंसपुरम में रहने वाले 22 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड ओमजी शुक्ला को केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर (CGST) विभाग से 3.14 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस मिला है। नोटिस में दावा किया गया है कि उनके नाम पर 17 करोड़ से अधिक का कपड़े का कारोबार हुआ है। यह नोटिस मिलने के बाद परिवार स्तब्ध है और इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
ओमजी शुक्ला काकादेव कोचिंग मंडी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। वह केवल 12वीं पास हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण रात की ड्यूटी कर करते हैं। दो सप्ताह पहले CGST दिल्ली कार्यालय से उन्हें पहला नोटिस मिला, जो उनके घर पर न मिलने के कारण पड़ोसी को सौंपा गया। इसके बाद 21 अगस्त को 32 पन्नों का विस्तृत नोटिस आया, जिसमें उनके पैन कार्ड और पते का उल्लेख था।
नोटिस में कहा गया कि ओमजी ने ₹17.47 करोड़ का कारोबार किया है और इस पर ₹3.14 करोड़ टैक्स देय है। साथ ही, सात दिनों के भीतर दस्तावेज़ों के साथ विभाग के सामने पेश होने का आदेश दिया गया।
A 22-year-old security guard in Kanpur gets a shocking ₹3.14 crore CGST notice, accused of running a ₹17 crore textile business. #Kanpur #CGST #TaxNotice pic.twitter.com/iWxDS7kO8x
— The Vocal News (@thevocalnews) August 27, 2025
परिवार की दहशत और सवाल
ओमजी के परिवार और पड़ोसियों को समझ नहीं आ रहा कि एक सिक्योरिटी गार्ड के नाम पर इतना बड़ा कारोबार कैसे दिखाया गया। अधिकांश लोगों ने नोटिस को फर्जी बताया, लेकिन उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा ने टैक्स सलाहकारों से बातचीत के बाद पुष्टि की कि नोटिस में दर्ज रकम आधिकारिक रूप से लिखी गई है।
अधिकारियों की सलाह
परेशान ओमजी ने कानपुर के सर्वोदय नगर स्थित GST कार्यालय में आयुक्त रोशन लाल से मुलाकात की। आयुक्त ने उन्हें सलाह दी कि वे नोटिस का औपचारिक जवाब दें और दिल्ली कार्यालय से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी नोटिस को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए, उसकी पुष्टि केवल संबंधित विभाग ही कर सकता है।
नोटिस की प्रामाणिकता पर संदेह
इस पूरे मामले ने समुदाय में चर्चा छेड़ दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह किसी तकनीकी गड़बड़ी या पहचान की चोरी (Identity Theft) का मामला है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन को भी इसमें हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।