भारतीय जेम्स बॉन्ड ‘अजीत डोभाल’ के रोमांचक किस्से, जिसके नाम से कांपता है पाकिस्तान

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पुरातन काल से युद्धों में अक्सर दिमाग को बल के मुक़ाबले अधिक तरजीह दी गई है क्यूंकि तेज़ बुद्धि व निर्णय अक्सर हारे हुए युद्ध को अंतिम पग में जीतकर दिखाता है. ऐसे ही बुद्धि के राजा ,आधुनिक भारत के चाणक्य और भारतीय सुरक्षा का मजबूत स्तंभ है जेम्स बॉन्ड के नाम से मशहूर वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल. इनके बारे में कहा जाता है की हमारे देश के प्रधानमंत्री में बाद अगर कोई दूसरा शक्तिशाली व्यक्ति है तो वो है अजीत डोभाल.

कौन है अजीत डोभाल

अजीत डोभाल का जन्म 1945 को उत्तराखंड स्थित पौड़ी गढ़वाल में हुआ था. उनकी पढ़ाई अजमेर मिलिट्री स्कूल में हुई है. केरल के 1968 बैच के IPS अफसर डोभाल अपनी नियुक्ति के चार साल बाद 1972 में ही इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) से जुड़ गए थे. उन्होंने अपना ज्यादातर समय खुफिया विभाग में जासूसी करके गुजारा है. वह 2005 में आईबी की डायरेक्टर पोस्ट से रिटायर हुए हैं. गौरतलब है उन्होंने अपने पूरे करियर में सिर्फ सात साल ही पुलिस की वर्दी पहनी है.

वह मल्टी एजेंसी सेंटर और ज्वाइंट इंटेलिजेंस टास्क फोर्स के चीफ भी रह चुके हैं. डोभाल को जासूसी का लगभग 37 साल का अनुभव है. वह 31 मई 2014 को देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने.

डोभाल से क्यों डरता है पाकिस्तान..?

डोभाल कई ऐसे खतरनाक कारनामों को अंजाम दे चुके हैं जिन्हें सुनकर जेम्स बांड के किस्से भी फीके लगते हैं. वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर आसीन अजीत कुमार डाभोल से बड़े-बड़े मंत्री भी सहमे रहते हैं, तो चलिए जानते है उनसे जुड़े कुछ बहादुरी के अनसुने किस्से –

  • भारतीय सेना के एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के दौरान उन्होंने एक गुप्तचर की भूमिका निभाई और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई जिसकी मदद से सैन्य ऑपरेशन सफल हो सका. इस दौरान उनकी भूमिका एक ऐसे पाकिस्तानी जासूस की थी, जिसने खालिस्तानियों का विश्वास जीत लिया था और उनकी तैयारियों की जानकारी मुहैया करवाई थी.
  • जब 1999 में इंडियन एयरलाइंस की उड़ान आईसी-814 को काठमांडू से हाईजैक कर लिया गया था तब उन्हें भारत की ओर से मुख्य वार्ताकार बनाया गया था. बाद में, इस फ्लाइट को कंधार ले जाया गया था और यात्रियों को बंधक बना लिया गया था.
  • कश्मीर में भी उन्होंने उल्लेखनीय काम किया था और उग्रवादी संगठनों में घुसपैठ कर ली थी. उन्होंने उग्रवादियों को ही शांतिरक्षक बनाकर उग्रवाद की धारा को मोड़ दिया था. उन्होंने एक प्रमुख भारत-विरोधी उग्रवादी कूका पारे को अपना सबसे बड़ा भेदिया बना लिया था.
  • अस्सी के दशक में वे उत्तर पूर्व में भी सक्रिय रहे. उस समय ललडेंगा के नेतृत्व में मिजो नेशनल फ्रंट ने हिंसा और अशांति फैला रखी थी, लेकिन तब डोवाल ने ललडेंगा के सात में छह कमांडरों का विश्वास जीत लिया था और इसका नतीजा यह हुआ था कि ललडेंगा को मजबूरी में भारत सरकार के साथ शांतिविराम का विकल्प अपना पड़ा था.
  • डोभाल ने वर्ष 1991 में खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट द्वारा अपहरण किए गए रोमानियाई राजनयिक लिविउ राडू को बचाने की सफल योजना बनाई थी.
  • डोभाल ने पूर्वोत्तर भारत में सेना पर हुए हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई और भारतीय सेना ने सीमा पार म्यांमार में कार्रवाई कर उग्रवादियों को मार गिराया. भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना और एनएससीएन खाप्लांग गुट के बागियों सहयोग से ऑपरेशन चलाया, जिसमें करीब 30 उग्रवादी मारे गए हैं.
  • डोभाल ने पाकिस्तान और ब्रिटेन में राजनयिक जिम्मेदारियां भी संभालीं और फिर करीब एक दशक तक खुफिया ब्यूरो की ऑपरेशन शाखा का लीड किया.
  • एक मामला हुआ सिक्किम का था ,वहा का राजा ने एक अमेरिकी लड़की से शादी कर ली और जिस लड़की से शादी की वो अमेरिका की एक सीआईए एजेंट थी .जब इस बात का पता भारत सरकार को चला तो यहाँ अफरा तफरी मच गयी ,तब अजित डोभाल को वहा भेजा गया और उन्होंने वहा जा कर वहा की एक पार्टी को पकड़ा और उनको सिक्किम के राजा के खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया ,बस फिर क्या था वहा के लोगो ने भारत के पक्ष में वोट दिया और इस मामले को भी सुलझा दिया .

कीर्ति चक्र से हो चुके है सम्मानित

अजीत डोभाल भारत के इकलौते ऐसे पुलिस अधिकारी हैं जिन्हें कीर्ति चक्र और शांतिकाल में मिलने वाले गैलेंट्री अवॉर्ड से नवाजा गया है. डोभाल ने पठानकोट ऑपरेशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. डोभाल कई सिक्युरिटी कैंपेन का हिस्सा रहे हैं. इसी के चलते उन्होंने जासूसी की दुनिया में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं. 

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