पेंशन फोरम की बैठक में सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी, आठवें वेतन आयोग और लंबित मांगों को लेकर उठी आवाज

 
पेंशन फोरम की बैठक में सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी, आठवें वेतन आयोग और लंबित मांगों को लेकर उठी आवाज

कानपुर। पेंशन फोरम की कार्यकारिणी की बैठक चित्रगुप्त धर्मशाला, सी ब्लॉक गोविंद नगर में अध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक को संबोधित करते हुए महामंत्री आनंद अवस्थी ने कहा कि केंद्र सरकार ने अभी तक आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा नहीं की है, जिससे जनवरी 2026 में कर्मचारियों और पेंशनरों को कोई लाभ मिलना मुश्किल दिख रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो सभी केंद्रीय और राज्य पेंशनर मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे और यह आंदोलन अंतिम चरण तक ले जाया जाएगा।

लंबित मांगें

बैठक में पेंशनरों की प्रमुख लंबित मांगें रखी गईं, जिनमें शामिल हैं:

  • कोशियारी कमेटी की सिफारिशों के आधार पर EPS-95 सेवानिवृत्त कर्मियों को 7500 रुपये की पेंशन और महंगाई राहत दी जाए।

  • 10 महीने का बकाया महंगाई भत्ता/राहत का भुगतान।

  • वरिष्ठ नागरिकों को रेल किराए में कोरोना से पहले दी जा रही छूट बहाल करना।

  • IIT के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को CGHS सुविधा देना।

  • 65, 70, 75 और 80 वर्ष की आयु पर क्रमशः अतिरिक्त पेंशन 5%, 10%, 15% और 20% लागू करना।

  • पेंशन को आयकर से मुक्त करना।

  • हर पेंशनर को दो वर्ष में एक बार भारत भ्रमण की सुविधा देना।

  • पुरानी पेंशन योजना की बहाली।

स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल

अवस्थी ने आरोप लगाया कि CGHS से जुड़े अस्पताल मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं और दवाइयों में भी हेरफेर हो रहा है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों को लिखी गई दवाओं के बजाय सस्ती दवाएं दी जाती हैं, जिस पर निदेशक मौन हैं। उन्होंने इस मामले में सचिव स्तर पर कार्रवाई की मांग की।

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आंदोलन का आह्वान

राजकीय पेंशन संगठन कानपुर के अध्यक्ष बी.एल.एल. गुलबिया ने कहा कि सरकार वेतन आयोग, रोके गए महंगाई भत्ते और वरिष्ठ नागरिकों को दी जा रही सुविधाओं पर चुप्पी साधे हुए है। ऐसे में पेंशनरों को क्रांति दिवस सप्ताह के समापन पर आंदोलन की शुरुआत करनी होगी।

अध्यक्ष राजेश शुक्ला ने कहा कि अब “करो या मरो” की स्थिति आ गई है और पेंशनरों को एकजुट होकर सरकार से आठवें वेतन आयोग के गठन की मांग करनी होगी।

बैठक में उपमहामंत्री सत्यनारायण ने प्रस्ताव रखा कि सभी लंबित मांगों को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को क्रमिक पत्र भेजे जाएं जब तक कि सरकार मांगों को पूरा न करे।

बैठक में नीलम शुक्ला, एस.एम. तिवारी, सुभाष भाटिया, बी.पी. श्रीवास्तव, अरूणेश कुमार तिवारी, अशोक कुमार, धनराज सिंह, रमेश चंद्र, एच.एन. तिवारी, सतीश चंद्र सिंह, पी.एस. बाजपेई, शिव शंकर शर्मा सहित कई पेंशनर नेता मौजूद रहे।

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