लंबित मांगों पर पेंशनर्स फोरम का सरकार से शीघ्र निर्णय का आग्रह, आंदोलन की चेतावनी
पेंशनर्स फोरम की कार्यकारिणी बैठक में शनिवार को पेंशनभोगियों की लंबे समय से लंबित विभिन्न मांगों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में सरकार से इन मांगों पर जल्द अंतिम निर्णय लेने का आग्रह किया गया। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
फोरम के महामंत्री आनंद अवस्थी ने कहा कि पेंशनर्स से संबंधित कई अहम मुद्दे वर्षों से विचाराधीन हैं। उन्होंने बताया कि इन मांगों का संबंध देशभर के लगभग दो करोड़ पेंशनभोगियों और उनके परिवारों से है। प्रमुख मांगों में आठवें वेतन आयोग में पेंशनर्स को शामिल करना, 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते को मूल पेंशन/वेतन में समायोजित करना और सभी पेंशनभोगियों को आयकर से छूट देना शामिल है। इसके अतिरिक्त ईपीएस-95 के अंतर्गत न्यूनतम 7,500 रुपये मासिक पेंशन तथा उस पर महंगाई भत्ता प्रदान करने की मांग भी दोहराई गई।
बैठक में वरिष्ठ नागरिकों को कोविड-काल से पूर्व उपलब्ध रेलवे सहित अन्य रियायतों को पुनः बहाल करने की मांग उठाई गई। साथ ही 65, 70, 75 और 80 वर्ष की आयु पर अतिरिक्त पेंशन वृद्धि संबंधी प्रस्ताव को दोबारा लागू करने की बात कही गई।
फोरम ने आईआईटी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सीजीएचएस सुविधा देने, सभी रिटायर्ड कर्मचारियों को प्रत्येक दो वर्ष में एक बार सहायक के साथ भारत भ्रमण की सुविधा प्रदान करने और कोरोना काल में रोकी गई महंगाई राहत राशि का भुगतान करने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी।
बैठक में बी.एल. गुलाटी, सत्य नारायण, बी.पी. श्रीवास्तव, ए.के. निगम, जे.के. पांडेय, डी.पी. तिवारी, सुभाष भाटिया, डी.के. शुक्ल, आर.पी. मिश्रा और केशव चंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित रहे। फोरम ने स्पष्ट किया कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलनात्मक कार्यक्रम घोषित किए जाएंगे।