पीआरएसआई के राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस 2026 में ‘सत्य बनाम नैरेटिव’ पर जोर, जनसंपर्क को लोकतंत्र का पाँचवाँ स्तंभ बताया

 
पीआरएसआई के राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस 2026 में ‘सत्य बनाम नैरेटिव’ पर जोर, जनसंपर्क को लोकतंत्र का पाँचवाँ स्तंभ बताया

नई दिल्ली, 21 अप्रैल 2026: पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) ने “जनसंपर्क: लोकतंत्र का पाँचवाँ स्तंभ” विषय के साथ राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस 2026 उत्साहपूर्वक मनाया। इस कार्यक्रम में मीडिया, न्यायपालिका, कूटनीति और शिक्षा जगत के अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने भाग लिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाने में जनसंपर्क की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि राम बहादुर राय ने कहा कि जनसंपर्क मूल रूप से जनहित की सेवा करता है। उन्होंने कहा कि पीआरएसआई जिम्मेदारी पर आधारित राष्ट्रहित की भावना को दर्शाता है। उन्होंने संचार में “नैरेटिव” के अत्यधिक उपयोग के प्रति सावधान करते हुए कहा कि आकर्षक लेकिन भ्रामक संदेशों के कारण सत्य को दबाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने पेशेवरों से नैरेटिव और वास्तविकता के बीच अंतर समझने तथा नैतिक एवं सत्यनिष्ठ संचार अपनाने का आह्वान किया।

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Ram Bahadur Rai

इस अवसर पर न्यायमूर्ति भंवर सिंह (पूर्व न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय) ने पीआरएसआई के 68 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी और विषय को समयानुकूल बताया। उन्होंने संविधान के तीन स्तंभ—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—का उल्लेख करते हुए मीडिया को चौथा स्तंभ बताया तथा कहा कि जनसंपर्क अब पाँचवें स्तंभ के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क संस्थाओं और नागरिकों के बीच सेतु का कार्य करता है, नीतियों को सरल बनाता है तथा पारदर्शिता और विश्वास को मजबूत करता है। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 का उल्लेख करते हुए जागरूक नागरिकों के महत्व पर बल दिया।

डॉ. संदीप मारवाह (चांसलर, एएएफटी यूनिवर्सिटी) ने कहा कि जनसंपर्क केवल प्रचार या छवि निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रचनात्मकता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, नैतिकता और मानवीय संबंधों पर आधारित एक महत्वपूर्ण विधा है। उन्होंने कहा कि सफल संचार वही है जो विश्वास और सहभागिता को बढ़ाए।

राजदूत अखिलेश मिश्रा ने अपने संबोधन में सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण को सतत विकास के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और विविधता को उसकी विशेष शक्ति बताया तथा “सर्व धर्म समभाव” के सिद्धांत पर बल दिया।

डॉ. अजीत पाठक ने कहा कि जनसंपर्क भारतीय लोकतंत्र का पाँचवाँ स्तंभ बनकर उभर रहा है और पीआरएसआई एक स्वतंत्र तथा राष्ट्र-केंद्रित संगठन के रूप में कार्य कर रहा है।

प्रो. चारु लता सिंह ने स्वागत भाषण में बताया कि पीआरएसआई, जिसकी स्थापना 1958 में हुई, देशभर के जनसंपर्क पेशेवरों और एजेंसियों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक राष्ट्रीय संस्था है। उन्होंने दिल्ली चैप्टर द्वारा किए जा रहे प्रभावी कार्यों और संचार उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर पीआरएसआई ने अपनी पत्रिका हार्मनी का विशेष अंक भी जारी किया, जो जनसंपर्क की बढ़ती भूमिका और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में इसके योगदान को रेखांकित करता है।

पत्रिका हार्मनी का विशेष अंक

कार्यक्रम के दौरान पीआरएसआई दिल्ली चैप्टर में उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए। सम्मानित होने वालों में सुश्री शिफाली आहूजा, सुश्री अंकिता श्रीवास्तव, श्री पंकज सक्सेना, श्री दीपक तनेजा, सुश्री वैशाली बिल्ला और डॉ. ऋतु दुबे शामिल रहे। पीआरएसआई हार्मनी टीम को भी उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में श्री दीपक तनेजा द्वारा आयोजित एक क्विज़ सत्र भी हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त रील मेकिंग प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा भी की गई, जिसने प्रतिभागियों की रचनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहित किया।

यह कार्यक्रम इस बात की पुष्टि करता है कि जनसंपर्क आज के समय में लोगों और संस्थाओं के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में कार्य करते हुए पारदर्शिता, विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ कर रहा है।

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