भोपाल: नसबंदी फेल, चौथे बच्चे के बाद संतोष शाह ने मांगा मुआवजा
भोपाल। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां चचर गांव के रहने वाले संतोष शाह अपनी पत्नी की नसबंदी फेल होने के नौ साल बाद भी मुआवजे की मांग कर रहे हैं। नसबंदी के बावजूद 2018 में उनके चौथे बच्चे का जन्म हुआ, जिससे अब परिवार की आर्थिक हालत बिगड़ गई है।
2016 में हुई थी नसबंदी
संतोष की पत्नी रामपति ने 30 जनवरी 2016 को सरकारी अस्पताल में नसबंदी कराई थी। लेकिन 4 जून 2018 को उन्होंने बेटे अंकित को जन्म दिया। अब अंकित सात साल का है और दूसरी कक्षा में पढ़ता है।
मुआवजे के लिए भटकते रहे संतोष
संतोष ने बताया कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उन्होंने अधिकारियों से संपर्क किया था, लेकिन उन्हें परिवार नियोजन क्षतिपूर्ति योजना के तहत मुआवजा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन कराने का मकसद बच्चों का खर्च नियंत्रित करना था, लेकिन अब सरकार को बेटे की शिक्षा में मदद करनी चाहिए।
चार बच्चों की पढ़ाई मुश्किल
संतोष और रामपति के पहले से तीन बच्चे हैं। संतोष ने कुछ साल पहले फैक्ट्री की नौकरी छोड़ी और अब खेती से परिवार का गुजारा करते हैं। चारों बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना उनके लिए भारी पड़ रहा है। हाल ही में बेटे की फीस भरने में दिक्कत आने के बाद उन्होंने फिर से मुआवजे की मांग शुरू की।
नियमों के तहत 30,000 रुपये का मुआवजा
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक FPIS योजना के तहत नसबंदी फेल होने पर 30,000 रुपये का मुआवजा मिलता है, बशर्ते क्लेम तय समय पर किया गया हो। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुष्पराज सिंह ने कहा कि संतोष ने समय पर आवेदन किया है तो वे मुआवजे के हकदार हैं और विभाग डिटेल्स की जांच कर रहा है।
“बच्चों का भविष्य अंधकार में न जाए”
संतोष का कहना है कि आर्थिक तंगी की वजह से बच्चों की पढ़ाई खतरे में पड़ गई है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि उन्हें जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए, ताकि बच्चों का भविष्य अंधकार में न डूबे।