ट्रंप का 100% टैरिफ: भारतीय दवा निर्यातकों पर संकट
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रत्याशित फैसला लेते हुए 1 अक्टूबर से ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर 100% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इस कदम से भारत के लगभग 10 अरब डॉलर मूल्य के फार्मा निर्यात पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि अमेरिका भारतीय दवाओं का सबसे बड़ा आयातक बाजार है।
हालांकि, जिन कंपनियों के पास पहले से अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट मौजूद हैं या निर्माणाधीन हैं, उन्हें इस टैरिफ से छूट दी जाएगी।
भारत पर संभावित असर
भारत मुख्य रूप से जेनेरिक दवाओं का निर्यातक है, इसलिए शुरुआती असर सीमित हो सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यदि कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स और बायोसिमिलर दवाएं भी इस टैरिफ के दायरे में आती हैं, तो भारतीय फार्मा कंपनियों की कमाई पर बड़ा असर पड़ेगा।
फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024–25 में भारत के कुल फार्मा निर्यात का 35% हिस्सा अमेरिका को गया, जिसकी कीमत लगभग 10 अरब डॉलर रही।
विश्लेषकों की राय
-
मैत्री सेठ (चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज): फिलहाल यह टैरिफ ब्रांडेड दवाओं पर है, लेकिन कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स पर लागू होने की स्थिति में बड़ी दिक्कत हो सकती है।
-
डॉ. वीके विजयकुमार (जियोजित इन्वेस्टमेंट्स): भारत जेनेरिक दवाओं का निर्यात करता है, इसलिए अल्पकालिक असर कम रहेगा। मगर भविष्य में जेनेरिक्स भी टारगेट बन सकते हैं।
-
ओम घवलकर (Share.Market): कम समय में फार्मा शेयरों पर दबाव दिखेगा, लेकिन लंबी अवधि में अमेरिकी सप्लाई चेन और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
किन कंपनियों पर ज्यादा जोखिम?
-
डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (DRL): आय का 47% अमेरिकी बाजार से।
-
सन फार्मा: कुल आय का 37% हिस्सा अमेरिका से।
-
सिप्ला: लगभग 30% आय अमेरिका से।
-
ऑरोबिंदो फार्मा: अमेरिकी बिक्री $1.6 अरब (2024) लेकिन अमेरिका में सीमित उत्पादन।
-
जायडस लाइफसाइंसेज: अमेरिकी आय पर निर्भर, इसलिए सबसे ज्यादा जोखिम।
भविष्य की रणनीति
भारतीय कंपनियां अब अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते बाजारों में विस्तार कर रही हैं और बायोसिमिलर व नई दवाओं पर निवेश बढ़ा रही हैं। इससे अमेरिका पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।