Vantara Controlversy: कोल्हापुर में हाथिनी महादेवी की वापसी की मांग पर हजारों लोगों की मौन रैली
कोल्हापुर, — कोल्हापुर में हाथिनी महादेवी (जिसे माधुरी के नाम से भी जाना जाता है) की वापसी की मांग को लेकर रविवार को एक विशाल मौन रैली निकाली गई। इस रैली में लगभग 30,000 से अधिक लोग शामिल हुए। यह रैली नंदानी से शुरू होकर जिला कलेक्ट्रेट तक पहुंची, जहाँ एक औपचारिक ज्ञापन भी सौंपा गया। इस आंदोलन का नेतृत्व पूर्व सांसद और किसान नेता राजू शेती ने किया।
रैली और जनसमर्थन
इस मौन मार्च में कोल्हापुर, सांगली और सातारा जिलों के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। विरोध के स्वरूप में हजारों मोबाइल उपयोगकर्ताओं ने अपने जिओ नंबर को पोर्ट कर अन्य नेटवर्क में शिफ्ट करने की घोषणा भी की। आंदोलनकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में यह प्रदर्शन उत्तर कर्नाटक तक भी फैलाया जाएगा, क्योंकि वहाँ भी मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में हाथियों का विशेष महत्व है।
अदालत का आदेश और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 16 जुलाई 2025 को हाथिनी महादेवी को गुजरात के वंतर (Vantara) ट्रस्ट में पुनर्वासित करने का आदेश दिया था। कोर्ट का यह निर्णय पर्यावरण मंत्रालय की हाई-पॉवर्ड कमिटी और पीपुल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया। रिपोर्ट में कहा गया था कि हाथिनी की हालत बेहद खराब है—उसे पैर में गंभीर संक्रमण (फुट रोट), अल्सर, मानसिक तनाव और नाखूनों की अत्यधिक वृद्धि जैसी समस्याएं हैं।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी 25 जुलाई को हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और दो सप्ताह के भीतर पुनर्वास पूरा करने का निर्देश दिया।
धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव
महादेवी लगभग 33 वर्षों तक नंदानी स्थित एक जैन मंदिर में रही, जहाँ उसे धार्मिक जुलूसों, अनुष्ठानों और शोभा यात्राओं में शामिल किया जाता था। आरोप यह भी लगे कि उसे लंबे समय तक जंजीरों में बांधा गया और कई बार व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। यही वजह है कि स्थानीय समुदाय हाथिनी को अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था का हिस्सा मानते हैं और उसकी वापसी की मांग कर रहे हैं।