रेड्डी बनाम राधाकृष्णन: एनडीए और इंडिया अलायंस ने खेला साउथ कार्ड
कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी (79) को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। विपक्ष का दावा है कि यह विचारधारा की लड़ाई है और इस बार गैर-राजनीतिक चेहरे को सामने लाकर बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई गई है।
रेड्डी का जन्म आंध्र प्रदेश के रंगारेड्डी जिले में हुआ था, जो अब तेलंगाना का हिस्सा है। वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में भी जज रह चुके हैं। विपक्ष की यह चाल खासतौर पर एनडीए के बड़े सहयोगी चंद्रबाबू नायडू और वाईएसआरसीपी के सामने कठिनाई खड़ी करती दिख रही है।
नानी फैक्टर और विपक्ष की रणनीति
बीजेपी ने जहां सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है, वहीं विपक्ष ने रेड्डी को मैदान में उतारकर ‘नानी फैक्टर’ पर निशाना साधा है। पीएम मोदी की सरकार नायडू और नीतीश कुमार के समर्थन से चल रही है। ऐसे में देखना होगा कि आंध्र प्रदेश की सत्ता संभाल रही टीडीपी इस मुद्दे पर किसके साथ खड़ी होती है।
दक्षिण के दलों पर दबाव
रेड्डी की उम्मीदवारी से दक्षिण भारत के दलों की भूमिका अहम हो गई है।
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वाईएसआरसीपी: लोकसभा में 4 और राज्यसभा में 7 सदस्य
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टीडीपी: लोकसभा में 16 और राज्यसभा में 2 सदस्य
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बीआरएस: राज्यसभा में 3 सदस्य
वहीं, एनडीए के प्रत्याशी राधाकृष्णन के चलते तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके के वोटों पर सेंध लगाने की कोशिश होगी। डीएमके के पास लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर कुल 32 वोट हैं।
नतीजा क्या होगा?
एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों ने ही अपने उम्मीदवारों के जरिए दक्षिण भारत को साधने की कोशिश की है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्षेत्रीय अस्मिता और राष्ट्रीय राजनीति के बीच किस ओर दक्षिणी दल झुकते हैं।