सरकार की आलोचना करने पर जब एक पत्रकार के पास डीएम को खुद पहुंचना पड़ा

MAKHANLAL CHATURVEDI

जब भी आप पत्रकारिता को नजदीक से देखिएगा तो आपको पता चलेगा की अभी जैसे पत्रकारिता में बिहारियों का वर्चस्व है 90 के दशक में मध्य प्रदेश के लोगों का हुआ करता था। मध्यप्रदेश के पत्रकारों की श्रंखला का एक नाम है माखनलाल चतुर्वेदी।

1963 में माखनलाल चतुर्वेदी को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में अपूर्व योगदान के कारण पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया।

पत्रकार होने के साथ-साथ माखनलाल चतुर्वेदी एक साहित्यकार और कवि भी थे। उनकी रचना ‘मुझे तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर देना तुम फेंक’ बहुत प्रसिद्ध हुई थी।

कलेक्टर: आपके अख़बार में काबिले-एतराज़ बातें छपती हैं।

माखनलाल: काबिले-एतराज़ बातें छापने के लिए ही हमने अख़बार निकाला है।

कलेक्टर: आप सरकार की आलोचना करते हैं।

माखनलाल: सरकार की आलोचना करने के लिए ही हमने अख़बार निकाला है।

कलेक्टर: मैं आपका अख़बार बंद करवा सकता हूँ।

माखनलाल: हमने यह मानकर ही अख़बार निकाला है कि आप इसे बंद करवा सकते हैं।

कलेक्टर: मैं आपको जेल में डाल सकता हूँ।

माखनलाल: हम यही मानकर यह सब करते हैं कि आप हमें जेल में डाल सकते हैं।

कलेक्टर हँसा और बोला देखो, मैं अंग्रेज़ नहीं हूँ, मैं आयरिश हूँ, लेकिन मैं इन घटिया अंग्रेज़ों का कर्मचारी हूँ. उन्हें दिखाने के लिए मुझे कुछ-न-कुछ कार्रवाई करनी पड़ेगी. इसलिए सतर्क रहो।

ये भी पढ़ें: Mayawati: वो पीछे मुड़ी और ऐसे गरजी कि अटल बिहारी की सरकार गिर गई