क्यों नेहरू ने डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को सोमनाथ मंदिर जाने से रोका था?

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बहुत पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टि्वटर हैंडल पर उनके हवाले से लिखा गया, ”अगर सरदार पटेल ना होते तो सोमनाथ में मंदिर संभव ना होता।” नरेंद्र मोदी के इस ट्वीट से इतर आज हम बात करेंगे सोमनाथ मंदिर से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के कनेक्शन की।

भारत के तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री सरदार पटेल 12 नवंबर, 1947 को सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का आदेश दिया था। महात्मा गांधी पटेल के इस फैसले पर खुश होते हुए बोले थे कि निर्माण के खर्च में लगने वाला पैसा आम जनता से दान के रूप में इकट्ठा किया जाना चाहिए, ना कि सरकारी ख़ज़ाने से दिया जाना चाहिए।

फिर गांधी की मृत्यु हो गई और पटेल और गांधी का सोमनाथ मंदिर का यह सपना अधूरा रह गया। फिर मंदिर को दुरुस्त करने की ज़िम्मेदारी तत्कालीन खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री केएम मुंशी पर आ गई।

फिर केएम मुंशी के निमंत्रण पर मई,1951 में तत्कालीन भाराष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद सोमनाथ मंदिर पहुंचे थे और कहा , ”सोमनाथ मंदिर इस बात का परिचायक है कि पुनर्निर्माण की ताक़त हमेशा तबाही की ताक़त से ज़्यादा होती है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नेहरू ने राजेंद्र प्रसाद को वहां ना जाने की सलाह दी थी। नेहरू का कहना था कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और राष्ट्रपति के किसी मंदिर के कार्यक्रम में जाने से ग़लत संकेत जाएगा। हालांकि, राष्ट्रपति महोदय ने प्रधानमंत्री साहब की राय नहीं मानी।

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