रूस-यूक्रेन युद्ध का असर पड़ेगा भारत में तेल कीमतों पर ? केंद्र सरकार इस कदम पर कर सकती है विचार

 
रूस-यूक्रेन युद्ध का असर पड़ेगा भारत में तेल कीमतों पर ? केंद्र सरकार इस कदम पर कर सकती है विचार
रूस-यूक्रेन युद्ध के आर्थिक प्रभाव पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलने की संभावना है. गुरुवार की सुबह यूक्रेन सीमा पर सैन्य अभियान शुरू करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की धमाकेदार घोषणा के बाद, ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत लगभग आठ वर्षों के बाद 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. जानकारों का मानना ​​है कि रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव से तेल की कीमतें और बढ़ेंगी. मीडिआ रिपोर्ट्स के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और तेल मंत्रालय ने वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल पर विस्तृत चर्चा की. पीएमओ ने वित्त मंत्रालय से भारत में मौजूदा उत्पाद शुल्क स्तरों का पुनर्मूल्यांकन करने को कहा है. सूत्रों ने कहा कि वित्त मंत्रालय इस बात का विश्लेषण कर रहा है कि इस रूस-यूक्रेन युद्ध भू-राजनीतिक संकट के बीच सरकार उत्पाद शुल्क की कितनी मार झेल सकती है. ध्यान देने की बात है कि पिछले साल भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं. आम आदमी को कुछ राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने 3 नवंबर को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में क्रमश: 5 रुपये और 10 रुपये की कटौती करने की घोषणा की थी. कई राज्यों ने सरकार के नक्शेकदम पर चलते हुए ईंधन की कीमतों पर वैट कम किया. तब से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें जस की तस बनी हुई हैं. अब गुरुवार को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर तक पहुंचने के साथ भारत जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि कर सकता है. सरकारी तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल और डीजल पर प्रतिदिन 10 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठा रही हैं. सूत्रों ने बताया कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को मौजूदा स्थिति से अवगत कराया गया. केंद्र सरकार ने अभी एक्साइज ड्यूटी घटाने पर कोई फैसला नहीं लिया है. सूत्रों ने कहा कि निर्णय उच्चतम राजनीतिक स्तर पर लिया जाएगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इससे पहले कहा था कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत की वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा हैं. सीतारमण ने इस सप्ताह की शुरुआत में वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) की बैठक के बाद कहा, "यह कहना मुश्किल है कि यह कैसे जाएगा. आज भी एफएसडीसी में जब हम वित्तीय स्थिरता के लिए उत्पन्न चुनौतियों को देख रहे थे, तो कच्चे तेल के दाम चर्चा के विषयों में से एक था. भारत कच्चे तेल के आयात के लिए रूस पर बहुत अधिक निर्भर नहीं है इसलिए आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों का नगण्य प्रभाव होगा. हालांकि रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है. वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में इसके प्रभुत्व को देखते हुए रूस द्वारा उत्पादन गतिविधियों में निलंबन का असर कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों पर पड़ेगा जिसका प्रभाव भारत पर भी लागू होगा.

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