CGHS अस्पतालों के बिल में बड़ी कटौती पर सवाल, पारदर्शिता की मांग को लेकर केंद्र को पत्र
कानपुर: केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के पैनल में शामिल अस्पतालों के बिलों से की जा रही बड़ी कटौती का मामला अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। पेंशन फोरम के महासचिव आनंद अवस्थी ने अपर सचिव एवं महानिदेशक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि कानपुर में CGHS पैनल अस्पतालों के बिलों से "अनुचित मद" के नाम पर बड़ी रकम काटी जा रही है। फोरम ने चिंता जताई है कि अस्पतालों को यह जानकारी नहीं दी जा रही है कि कितनी रकम काटी गई, किस मद में काटी गई और कटौती का कारण क्या है।
आनंद अवस्थी ने 10 नवंबर 2022 के कार्यालय ज्ञापन संख्या Z/1/2022-DIR(CGHS) का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि CGHS को बिलों की जांच करने और अनुचित मदों की रकम काटने का अधिकार है, लेकिन यह प्रक्रिया साफ, सही जानकारी वाली और उचित कारण पर आधारित होनी चाहिए। उनका कहना है कि कटौती का कारण नहीं बताए जाने पर अस्पतालों को अपना पक्ष रखने और बिल से कटौती का मिलान करने का मौका नहीं मिलता।
यह मुद्दा पेंशन फोरम और अपर निदेशक, CGHS कानपुर के बीच हुई बैठक में भी उठाया गया था। फोरम के अनुसार, बैठक में उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला। फोरम का कहना है कि जब कटौती से सेवा देने वाले अस्पताल को मिलने वाला भुगतान सीधे प्रभावित होता है तो इसे केवल विभाग का अंदरूनी लेखा मामला नहीं माना जाना चाहिए।
पत्र में छह प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें पूरे देश में बिल जांच की प्रक्रिया की समीक्षा करना, हर कटौती के साथ मद, मात्रा, रकम और नियम की जानकारी देना, बिल का निपटारा करने से पहले अस्पताल को कटौती का विवरण देना और कटौती पर सवाल या विवाद होने पर स्पष्टीकरण के लिए अपील की व्यवस्था बनाना शामिल है।
फोरम ने CGHS-2 लागू होने के बाद अस्पतालों के बिल के भुगतान में हो रही देरी की भी समीक्षा करने की मांग की है।
आनंद अवस्थी ने कहा कि अगर अस्पतालों को समय पर और पूरा भुगतान नहीं मिलता है तो इसका सीधा असर CGHS लाभार्थियों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।