World Meningitis Day: तेज सिर दर्द और बेहोशी जैसे लक्षण को नहीं करें नजरअंदाज, शहर में हो सकता है मेनिनजाइटिस, जानें कैसे करें बचाव
World Meningitis Day: 24 अप्रैल को हर साल विश्व मैनिंजाइटिस दिवस के रूप में मनाया जाता है। मेनिनजाइटिस एक प्रकार का संक्रामक रोग है, जो मस्तिष्क के अंदर वाले हिस्से मेनिन्जेस में मौजूद फ्लूड सीएसएफ में संक्रमण से होता है। इस बीमारी के कारण हैं। शरीर में कहीं भी मसलन कान, नाक, दांत, फेफड़ों में संक्रमण है तो भी हो सकता है। यह बीमारी संबंधित अंगों से खून के माध्यम से मस्तिष्क में भी चली जाती है। अगर समय पर इलाज न मिले तो मरीज की जान भी जा सकती है। इसलिए संक्रमण का तत्काल इलाज लेना चाहिए।
1. कम्युनिटी एक्वायड बैक्टीरियल
यह बैक्टीरिया से होता है। यह संक्रमण जानलेवा हो सकता है। यह भीड़भाड़ वाले जगहों पर जाने से वहां के संक्रमित लोगों को खांसने-छींकने से भी फैल सकता है। भीड़ वाली जगह जाते हैं तो मास्क लगाएं।
2. वायरल मेनिनजाइटिस
यह वायरस से होता है। यह बैक्टीरियल संक्रमण जितना 'खतरनाक नहीं है। अगर इम्युनिटी अच्छी है तो इससे बचाव होता है।
3. फंगल मेनिनजाइटिस
फंगस हमारे शरीर में ही होते हैं। जब 'इम्युनिटी कम होती हैं तो हो जाता है। जैसे मधुमेह, एचआइवी और कैंसर पीड़ितों को भी हो सकता है।
4. पैरासिटिक मेनिनजाइटिस
यह पैरासाइट से होता है, जो दिमाग और तंत्रिकातंत्र पर प्रभाव डालता है। ये बहुत कम होता है। अमेबिक मेनिनजाइटिस होता है जो बहुत दुर्लभ होता है। यह गंवा पानी नाक में जाने से होता है।
5. गैर संक्रामक मेनिनजाइटिस
यह किसी संक्रमण से नहीं बल्कि सिर पर चोट, कैंसर, ब्रेन सर्जरी, कुछ प्रकार की दवाइयां या ड्रग्स आदि से होता है।
जानिए जांच और इलाज
इस बीमारी की पहचान के लिए रीढ़ की हड्डी से द्रव निकालकर उसका अलग-अलग मानकों मसलन, बैक्टीरिया, वायरस या फंगस आदि किस कारण से हुआ है। उसकी पहचान होती है। इसके बाद उन कारणों का इलाज किया जाता है। जैसे बैक्टीरियल है तो एंटीबैक्टीरियल दवा देते हैं जबकि फंगल या वायरस है तो उसके लिए एंटीफंगल और एंटीवायरस दवा देते हैं। गैर संक्रामक मेनिनजाइटिस का इलाज कोर्टिसोन दवाओं (खास एलर्जी के लिए उपयोग की जाने वाली दवाइयां) की मदद से किया जा सकता है। कुछ मामलों में तो दवा की भी जरूरत नहीं पड़ती है। गंभीर स्थिति में मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती करना होता है।
वैक्सीन और हाइजीन से बचाव हो सकता
इस बीमारी के बचावों पर ध्यान दें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाते हैं तो मास्क लगाएं। धूमपान न करें। बच्चों-बुजुर्गों को न्यूमोकोकल वैक्सीन लगते हैं। वे भी लगवाएं। इनसे भी संक्रमण से बचाव होता है। वायरल संक्रमण भी हवा से फैलते हैं। इसका ध्यान रखें। पैरासाइट और फंगस से बचाव वाले काम करें जैसे घर में सीलन, जानवरों और पक्षियों के मल से दूर रहें। हाइजीन का ध्यान रखें कोई भी चीज किसी से अन्य के साथ साझा न करें।