पेंशनर्स फोरम ने कानपुर में CGHS की लिफ्ट, दवाओं और अस्पताल बिल का मुद्दा उठाया
कानपुर: पेंशनर्स फोरम के महामंत्री आनंद अवस्थी के नेतृत्व में सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 9 सितंबर को रतनलाल नगर, कानपुर स्थित CGHS के अपर निदेशक से मुलाकात की। बैठक में पेंशनर्स और अन्य लाभार्थियों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक में CGHS कार्यालय में लिफ्ट लगाए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। अपर निदेशक ने बताया कि लिफ्ट के लिए डायरेक्टर कार्यालय से बजट पास हो गया है। इस संबंध में सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) को टेंडर की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पत्र भेज दिया गया है। डायरेक्टर कार्यालय से पैसा मिलते ही इसे CPWD को भेजा जाएगा और इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर काम शुरू किया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल ने खपरा मोहाल की CGHS डिस्पेंसरी का मुद्दा भी उठाया। बताया गया कि उचित जगह मिलने पर डिस्पेंसरी को सरकारी भवन में शिफ्ट किया जाएगा। आनंद अवस्थी ने कहा कि पंडित होटल के आसपास सरकारी भवन दिलाने के लिए कमांडेंट, COD से बातचीत की जा रही है। इसके लिए डायरेक्टर कार्यालय से कमांडेंट, COD के नाम पत्र भी भेजा गया है।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से 19 सितंबर 2026 को जारी मेमोरेंडम पर भी चर्चा हुई। अपर निदेशक ने बताया कि जल्द ही एक बोर्ड बनाया जाएगा और इससे जुड़े मामलों पर कार्रवाई की जाएगी। श्री गुप्ता को उनके बेटे के इलाज के संबंध में आवेदन और पूरी फाइल कमरा नंबर 1 में जमा करने के लिए कहा गया।
मृतक कर्मचारियों के आश्रितों की नियुक्ति का मुद्दा भी बैठक में उठाया गया। अपर निदेशक ने बताया कि नियुक्ति के लिए कार्रवाई चल रही है।
लाभार्थियों को डॉक्टर की ओर से लिखी गई दवाओं की जगह दूसरी दवाएं दिए जाने पर भी चर्चा हुई। अपर निदेशक ने ऐसे फार्मासिस्टों के नाम देने को कहा। आनंद अवस्थी ने कहा कि इस संबंध में पहले ही सर्कुलर जारी किया जा चुका है और डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा ही लाभार्थी को दी जानी चाहिए। अपर निदेशक ने कहा कि यदि कोई फार्मासिस्ट इसका पालन नहीं करता है तो उसकी लिखित शिकायत की जाए। शिकायत मिलने पर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
अस्पतालों के बिल में की जा रही कटौती का मुद्दा भी प्रतिनिधिमंडल ने उठाया। अपर निदेशक ने बताया कि अस्पतालों के बिल डायरेक्टर कार्यालय की ओर से जांच के लिए देश के अलग-अलग डॉक्टरों को भेजे जाते हैं। बिल पास होने के बाद भुगतान के लिए स्थानीय कार्यालय को भेजा जाता है और राशि के भुगतान के लिए डायरेक्टर कार्यालय को जानकारी दी जाती है।
फोरम ने इस जवाब पर असहमति जताई। आनंद अवस्थी ने कहा कि इस मामले को स्वास्थ्य विभाग, भारत सरकार के सचिव के सामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि अस्पतालों के बिल में यदि कोई कटौती की जाती है तो उसका कारण अस्पताल को बताया जाना चाहिए। उनका कहना था कि कटौती का कारण नहीं बताए जाने से अस्पतालों में असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर आगे चलकर लाभार्थियों के इलाज पर भी पड़ सकता है।
बैठक में आनंद अवस्थी, सत्य नारायण, एच एन तिवारी, सुभाष भाटिया, ए एस राठौड़, ए के निगम और अशोक अवस्थी शामिल रहे।