Janmashtmi 2022: तो इस कारण 2 दिनों तक मनाया जाता है जन्माष्टमी का त्योहार? जानिए धार्मिक महत्व

Janmashtmi 2022
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Janmashtmi 2022: हिंदू धर्म में हर वर्ष भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस के तौर पर जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अवतार लेकर अधर्म का नाश करके धर्म की स्थापना की थी. तभी से जन्माष्टमी का त्योहार भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के तौर पर मनाया जाता है. हर साल यह त्योहार भादो के महीने में मनाया जाता है.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जन्माष्टमी का त्योहार मुख्य रूप से 2 दिन तक क्यों मनाया जाता है? यदि नहीं तो हमारे आज के इस लेख में हम आपको इसी विषय में बताने वाले हैं. तो चलिए जानते हैं..

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जन्माष्टमी के त्योहार को 2 दिन मनाए जाने के पीछे यह है मान्यता

भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन यानी जन्माष्टमी का त्योहार दो संप्रदायों की मान्यताओं के अनुसार मनाया जाता है. जिनमें से एक है वैष्णव संप्रदाय और दूसरा स्मार्त संप्रदाय. हिंदू कैलेंडर के मुताबिक यदि जन्माष्टमी की 2 तारीख की निर्धारित होती हैं. तो उसमें पहले जन्माष्टमी का त्योहार स्मार्त संप्रदाय और दूसरे दिन संप्रदाय के लोग मनाते हैं.

Janmashtmi 2021

हिंदू कैलेंडर के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भादो महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. वैष्णव संप्रदाय के लोग इस्कॉन संस्था के आधार पर जन्माष्टमी का त्योहार मनाते हैं. और साथ ही सिद्धांतों का पालन करते हैं,

उनके अनुसार भादो महीने की अष्टमी तिथि ही जन्माष्टमी के पर्व की तिथि है. जबकि स्मार्त संप्रदाय को मानने वाले लोग सप्तमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण के जन्म की तिथि मानते हैं, जिस कारण वह सप्तमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव यानि जन्माष्टमी के तौर पर मनाते हैं.

Janmashtmi

इस बार जन्माष्टमी का त्योहार 18 और 19 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा. इस दौरान अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अगस्त की रात्रि 9:21 से शुरू होकर 19 अगस्त की 10:59 तक रहेगा.

इस तरह से वैष्णव संप्रदाय के लोग भगवान श्री कृष्ण के जन्म को अष्टमी तिथि में मनाते हैं, जबकि स्मार्त संप्रदाय
सप्तमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण के जन्म को प्रभावी मानते हैं. हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दोनों की तिथियां उचित है, यही कारण है कि जन्माष्टमी का त्योहार 2 दिन तक मनाया जाता है.