Lohri 2022: क्या होता है लोहड़ी शब्द का अर्थ? जानिए इस पर्व से जुड़ी 5 जरूरी बातें

Lohri 2022

Lohri 2022: देश में लोहड़ी के पर्व को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है क्योंकि यह त्योहार बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी लोग काफी इंजोय करते हैं. वहीं इस बार लोहड़ी पहले की तरह 13 जनवरी यानि बुधवार को ही मनाई जाएगी. इस पर्व को तो लोग काफी शौक से मनाते हैं लेकिन कई लोग ऐसे भी होंगे जो कि लोहड़ी शब्द का अर्थ नहीं जानते होंगे. आज हम आपको इसका अर्थ और इससे जुड़ी पांच जरूरी बातें बताएंगे…

1. सबसे पहले लोहड़ी के त्योहार को कई लोग लाल लोई के नाम से भी जानते हैं. यह त्योहार विशेषरूप से उत्तर भारत के प्रसिद्ध पर्वों में से एक है. यह पर्व मुख्य रूप से सिख धर्म के लोगों से जुड़ा हुआ है लेकिन अब इसे हर कोई अपने घर पर मनाता है. सबसे ज्यादा इस त्योहार को पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है.

2. लोहड़ी का त्योहार पंजाबियों के लिए खास होता है. जिस घर में नया विवाह हुआ हो या फिर बच्चा पैदा हुआ हो उन्हें स्पेशल तौर पर बधाइयां दी जाती हैं. इसके अलावा घर में नव वधू या बच्चे की पहली लोहड़ी बहुत विशेष मानी जाती है. इसलिए इस खास मौके पर बहन और बेटियों को अपने घर बुलाया जाता है.

3. माना जाता है कि यह त्योहार संत कबीर की पत्नी लोई की याद में मनाया जाता है. इसके अलावा यह भी मान्यता है कि सुंदरी और मुंदरी नाम की लड़कियों को राजा से बचाकर दुल्ला भट्टी नामक एक डाकू ने अच्छे लड़कों से उनकी शा‍दी करवा दी थी.

इस पर्व की ये है मान्यता

4. पौराणिक मान्यता के मुताबिक यह पर्व सती के त्याग के रूप में भी मनाया जाता है. कथानुसार प्रजापति दक्ष के यज्ञ की आग में कूदकर शिव की पत्नी सती ने आत्मदाह कर लिया था तो उनकी याद में यह त्योहार सेलिब्रेट किया जाता है.

5. लोहड़ी को पहले तिलोड़ी कहा जाता था. यह शब्द तिल और रोड़ी (गुड़ की रोड़ी) शब्दों के मेल से जोड़कर बनाया गया है, जो समय के साथ बदलकर लोहड़ी के रूप में काफी प्रचलित हो गया है. मकर संक्रांति के दिन भी तिल-गुड़ खाने और बांटने का परंपरा होती है.

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