मामूली कोरोना संक्रमण भी बना सकता है आपके शरीर में एंटीबॉडी- शोध

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कोरोना वायरस की दूसरी लहर की रफ्तार में कमी देखने को मिली है. जहां एक ओर संक्रमण के लिहाज़ से भारत दुनिया का तीसरा सबसे अधिक प्रभावित देश रहा तो वहीं दूसरी ओर देश में संक्रमितों की संख्या इलाज के बाद से कम होती दिखी.

वहीं अब एक शोध के मुताबिक कोरोना के हल्के लक्षण वाले मरीजों में संक्रमण के 11 महीने बाद भी एंटीबॉडी पाई गई है. बता दें कि शोधकर्ताओं का दावा है कि ये एंटीबॉडी जीवन भर लोगों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करेंगी.

हालांकि एक अन्य शोध में जब ब्रिटेन के लोगों की जांच की गई तो 60 फीसद से 70 फीसद लोगों के शरीर में एंटीबॉडी मिली हैं. यानी वैक्सीन से हर्ड इम्यूनिटी का लक्ष्य पाना संभव है.

हालांकि वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्‍कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने कहा कि उनकी जांच यह बताती है कि बोन मैरो में मौजूद इम्‍यून सेल्‍स अब भी एंटीबॉडी बना रहे हैं जबकि खून के अंदर उनका स्‍तर गिर गया है.

शोध के परिणामों से पता चला है कि कोरोना से पीड़ित रहे मरीजों में इस वायरस को बेअसर करने वाली एंटीबॉडी 7 से 11 महीने बाद भी मौजूद है. इसी के साथ मेडिसिन और मॉलिक्यूलर माइक्रोबायोलॉजी के पैथोलॉजी और इम्यूनोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एली एलेबेडी के मुताबिक एंटीबॉडी जल्द नष्ट हो जाती है,

ये गलत जानकारी फैलाई गई है. बोन मैरो में मौजूद रोग प्रतिरोधी कोशिकाएं एंटीबॉडी का निर्माण करती रहती हैं, भले ही रक्त में इनकी संख्या कम हो जाए. एंटीबॉडी की संख्या कभी शून्य नहीं होती है. इस बात के मजबूत प्रमाण हैं कि कोशिकाएं जीवन भर लोगों को कोविड से सुरक्षा प्रदान करती हैं.