Robin Uthhappa से Piyush Chawla तक, यह भारतीय क्रिकेटर्स नहीं पा सके कोई मुकाम

piyush chawla
Instagram / piyush chawla

क्रिकेट जगत में नाम कमाना बाहर से जितना सरल दिखाई देता है अंदर से उतना ही कठिन है क्योंकि इस खेल के प्रति निरन्तरता रखने वाले ही भविष्य में सफलता का रास्ता तय करते है.

रोबिन उथप्पा से लेकर पीयूष चावला तक ऐसे कई खिलाड़ी है जिनके क्रिकेट सफर का आगाज तो काफी धमाकेदार हुआ था

लेकिन बाद में उनके हुनर की चमक फीकी पड़ गई.

पीयूष चावला

पीयूष चावला एक और प्रतिभाशाली थे, जिनसे काफी उम्मीदें थे लेकिन टीम में अमित मिश्रा और हरभजन सिंह जैसे दिग्गज होने के कारण उन्हें टीम में बने रहने के लिए असाधारण प्रदर्शन करना था. ऐसे में उनकी राह काफी कठिन थी.

पीयूष का असमय चोटिल होना भी इनकी भारतीय टीम में स्थिर जगह न बना पाने का मुख्य कारण रहा.

इन्होंने भारत के लिये खेले 3 टेस्ट मैचों में मात्र 7 विकेट झटके है.

हालाँकि आईपीएल के 13 वें सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स ने नीलामी में पीयूष को 6.75 करोड़ रुपये में खरीदा था

पीयूष ने टीम के लिये शानदार गेंदबाजी भी की थी और सीजन में खेले 7 मैच में 6 विकेट लिए थे.

जयदेव उनादकट

घरेलू मैचों में शानदार प्रदर्शन के बाद जयदेव उनादकट ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अपना टेस्ट डेब्यू 19 साल की कम उम्र में कर लिया था.

साल 2010 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ जयदेव ने अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेला था.

जयदेव के इतनी कम उम्र में टीम में शामिल होने के कारण सभी उनके गेम के लिए काफी एक्साइटेड थे लेकिन जयदेव की परफॉर्मेंस ने सभी को काफी निराश कर दिया.

डेब्यू मैच में जयदेव ने 26 ओवर में 101 रन गंवाए. बावजूद इसके उन्होंने भारतीय टीम के लिए एक भी विकेट नहीं झटका.

डेब्यू मैच में ऐसे खराब प्रदर्शन के बाद जयदेव का नाम टीम से वापस ले लिया गया और इसके बाद वो इंटरनेशनल टेस्ट टीम में फिर कभी वापसी नहीं कर पाए.

अविष्कार साल्वी

मुंबई के तेज गेंदबाज अविष्कार साल्वी जिन्हें भारत का ग्लेन मैक्ग्रा कहा जाता था,

उनका करियर भी महज 4 वनडे तक ही सीमित रहा. 11 अप्रैल 2003 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डेब्यू करने वाले साल्वी का इंटरनेशनल करियर 18 नवंबर 2003 को खत्म हो गया.

साल्वी उसके बाद अगले 10 सालों तक घरेलू क्रिकेट खेले लेकिन उन्हें कभी टीम इंडिया में मौका नहीं मिला.

गौतम गंभीर और साल्वी का क्रिकेट करियर एक साथ शुरू हुआ था .लेकिन साल्वी क्रिकेट में गंभीर जितनी प्रसिद्धी अर्जित नहीं कर सके

विजय भारद्वाज

साल 1999 का एलजी कप कोई भारतीय क्रिकेट फैन नहीं भूल पाएगा.

नैरोबी में भारत, साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और केन्या के बीच खेली गई इस सीरीज में टीम इंडिया की ओर से एक ऑलराउंडर ने डेब्यू किया था, जिनका नाम विजय भारद्वाज था.

इस जबर्दस्त ऑलराउंडर ने सीरीज में कुल 10 विकेट हासिल किये थे और साथ ही 89 रन भी बनाए. जिसके बाद उन्हें मैन ऑफ द सीरीज अवॉर्ड मिला.

लेकिन जल्द ही इस ऑलराउंडर का करियर खत्म हो गया. ये खिलाड़ी भारत के लिए महज 3 टेस्ट, 10 वनडे ही खेल पाया.

रॉबिन उथप्पा

भारतीय क्रिकेट के एक ओर चमकते स्टार रॉबिन उथप्पा से अपने शुरुआती दिनों में बहुत उम्मीदें थीं,

क्योंकि विकेटकीपर बल्लेबाज देश के सबसे महत्वपूर्ण क्रिकेटरों में से एक था, जिसने भारत को 2007 टी-20 विश्व के फाइनल में पहुंचने में मदद की.

लेकिन यह भी अपने खेल में नियमित रूप से अच्छा प्रदर्शन नही कर सके और जल्द ही टीम से बाहर हो गये.

आईपीएल के 14वें सीजन में ये चेन्नई सुपरकिंग्स की ओर से खेले थे लेकिन वहाँ भी इन्होंने कुछ खास कारनामा करके नही दिखाया है.

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