आर्थिक तंगी से गुजर रहे Vinod Kambli परिवार पालने के लिए BCCI से लगा रहे हैं मदद की गुहार, सचिन से नहीं कोई उम्मीद, देखें वीडियो

Vinod Kambli

इंडिया के पूर्व बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज विनोद कांबली (Vinod Kambli) आज कल आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं और पैसे के मामले में बहुत ही ज्यादा परेशान हैं. ये सब जानने के बाद से ही फैंस की कंबली के लिए चिंता बढ़ गई है. विनोद कांबली की हालत बेहत खस्ता है. कांबली बेरोजगार भी हैं और इन दिनों काम की तलाश कर रहे हैं।. वो फिहलहाल BCCI की 30 हजार रुपए की पेंशन के दम पर जी रहे हैं.

इस समय 50 वर्ष के इस पूर्व क्रिकेटर को पहचानना तक मुश्किल हो गया था. क्योंकि कांबली को उनके चुलबुले अंदाज के साथ साथ सोने की चेन, स्टाइलिश कैप और शानदार ड्रेस पहनने के लिए जाना जाता था लेकिन अब वो बेहद साधारण नजर आते हैं जिसकी वजह से उन्हें पहचान पाना मुश्किल हो गया है.

मिड-डे को बताया अपना हाल

कांबली ने अपनी माली हालत के बारे में मिड-डे से बात करते हुए कहा कि, मैं एक रिटायर्ड क्रिकेटर हूं और पूरी तरह से BCCI की पेंशन पर निर्भर हूं. मेरी आय सिर्फ पेंशन से ही है. मैं BCCI का आभारी हूं. मुझे काम चाहिए, ताकि मैं युवा क्रिकेटरों की मदद कर सकूं. मेरा परिवार है और मुझे उनकी देखभाल करनी है.

क्रिकेट से रिटायरमेंट लेने के बाद आपके लिए कोई क्रिकेट नहीं है, लेकिन अगर आपको जीवन में स्थिरता चाहिए तो असाइनमेंट्स होने जरूरी हैं. मैंने एमसीए से कई बार कहा कि अगर आपको मेरी जरूरत है तो मैं वहां हूं चाहे वह वानखेड़े स्टेडियम में हो या बीकेसी में. मुंबई क्रिकेट ने मुझे बहुत कुछ दिया है. मैं इस खेल के लिए अपने जीवन का ऋणी हूं.

Vinod Kambli

कांबली का क्रिकेट करियर

कांबली और सचिन को जिगरी दोस्त कहा जाता था. स्कूल के दिनों में सचिन तेंदुलकर के साथ कांबली ने रिकॉर्ड 664 रनों की साझेदारी कर क्रिकेट जगत में सनसनी मचा दी थी. कांबली ने अपने रणजी ट्रॉफी करियर की शुरुआत पहली गेंद पर छक्का लगाकर की. उन्होंने अपना वनडे और टेस्ट डेब्यू क्रमशः 1991 और 1992 में किया. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में 1992 के विश्व कप में भी भाग लिया और 1996 वर्ल्ड कप में भी टीम का हिस्सा रहे.

Vinod Kambli
credit : twitter.com/Manik_M_Jolly

कांबली ने आखिरी बार अक्टूबर 2000 में भारत के लिए खेला. विनोद कांबली ने अपना वनडे करियर 104 मैचों में 2 शतक और 14 अर्धशतक के साथ 2477 रन बनाकर समाप्त किया. साल 2008 में उन्होंने क्रिकेट के सभी फोर्मट्स से संन्यास की घोषणा कर दी थी.

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