MP NEWS:मानसरोवर सभागार में दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम का शुभारंभ, ओम बिरला भी हुए शामिल
 

 
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MP NEWS:मध्य प्रदेश विधानसभा में विधायकों का दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम आज मंगलवार को विधानसभा के मानसरोवर सभागार में शुरू हो गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला विधानसभा अध्यक्ष के साथ विधानसभा पहुंचे। इसके बाद विधायकों का सामूहिक फोटो सेशन हुआ।बता दें कि, इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर एवं मुख्यमंत्री श्री डॉ. मोहन यादव ने 16वीं विधानसभा के नव निर्वाचित सदस्यों हेतु प्रबोधन कार्यक्रम में निर्धारित विषयों परआधारितपृष्ठाधार सामग्री के संकलन का विमोचन किया।बता दें, लोकसभा अध्यक्ष आदरणीय ओम बिड़ला ने मध्यप्रदेश विधानसभा के नव-निर्वाचित सदस्यों के लिए विधानसभा भवन स्थित मानसरोवर सभागार में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित रहे।


नरेंद्र सिंह तोमर ने कही यह बात

इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि, "हम सब निर्वाचित होकर विधानसभा में आए हैं। स्वाभाविक रूप से हम जनप्रतिनिधि हैं तो एक अच्छा जनप्रतिनिधि बनना यह भी हम सब के लिए जरूरी है लेकिन साथ ही साथ एक अच्छा विधायक भी बनना हम सब के लिए जरूरी है।"विधायकों के प्रबोधन कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मप्र विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि, "अच्छा जनप्रतिनिधि बनने के लिए जरूरी है कि उसे नियम-प्रक्रिया की जानकारी हो। आज यह प्रचलन हो गया है कि सदन में चिल्ला कर बोलो तो अच्छा समझ जाएगा। सदन में बात रखते समय जोश दिखे पर वह होश से नियंत्रित हो। गुस्सा आचरण में झलक में नहीं चाहिए। सार्वजनिक हितों के प्रश्नों का अध्ययन होना चाहिए। प्रशिक्षण से आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा।"

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आज हम सबके लिए प्रसन्नता का क्षण है: ओम बिड़ला 

वहीं, इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि, "आज हम सबके लिए प्रसन्नता का क्षण है। शुरुआत में चार दिन का सत्र था, उस समय जब हम बैठे तो हमें लगा कि जल्द ही प्रशिक्षण की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। इसके लिए ज़रूरी था कि लोकसभा सचिवालय का सहयोग हमको मिले। हम सब निर्वाचित होकर विधानसभा में आये है। एक जनप्रतिनिधि बनना ज़रूरी है, अच्छा विधायक बनना भी ज़रूरी है। क्षेत्र की जानता की समस्या आपको सुलझानी होती है। अपने कृतित्व को अनुशासित करने की और नियमों में बांधने की ज़रूरत है। एमपी की विधानसभा में सदन की महिमा आपसे बढ़ेगी। सामान्य तौर पर पहले सदस्य प्रोत्साहित हो , उसके लिए पुरस्कार की प्रक्रिया थी, लेकिन बीच बीच में वो कुछ कारणों से ऊपर नीचे होती रही। जोश पूरी तरह होश के साथ नियंत्रित हो। बोलते समय ग़ुस्सा दिखे लेकिन ग़ुस्सा आना नहीं चाहिए।"


 

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