IIT ग्रेजुएट बताकर बुने सपनों के जाल में बुजुर्ग निवेशकों से ठगे 65 करोड़,

 
IIT ग्रेजुएट बताकर बुने सपनों के जाल

हेलिकॉप्टर–लक्ज़री कार–महंगी घड़ियों से रचा भ्रम का साम्राज्य, आखिरकार बेंगलुरु में गिरफ्तार हुआ ठग प्रतीक राधाकृष्णन

बेंगलुरु की सड़कों पर दौड़ती एक चमचमाती लक्ज़री कार, अंदर बैठा एक शख्स—सूटेड-बूटेड, स्टाइलिश घड़ी पहने और खुद को IIT का ग्रेजुएट बताने वाला। वो कहानियाँ सुनाता कि कैसे उसने न्यूयॉर्क और दुबई में काम किया, कैसे उसने विदेशी निवेशकों के साथ करोड़ों का बिज़नेस खड़ा किया और अब भारत में लोगों को अमीर बनाने आया है। लेकिन ये सब महज़ एक भ्रम का साम्राज्य था।

उस शख्स का नाम है प्रतीक राधाकृष्णन, उम्र 35 साल। पुलिस ने उसे बेंगलुरु से गिरफ्तार किया, जब उसके पीछे 65 करोड़ रुपये की पॉन्ज़ी स्कीम का काला सच खुल चुका था।

झूठी कहानियों पर बना भरोसा

नवंबर 2024 में एक निवेशक को उसके रिश्तेदार ने प्रतीक से मिलवाया। उसने 10 लाख रुपये लगाए और अगले ही महीने 90,000 रुपये ब्याज के रूप में वापस पा लिए। भरोसा इतना गहरा हुआ कि उसने धीरे-धीरे 5 करोड़ रुपये से ज्यादा झोंक दिए। लेकिन जल्द ही सच्चाई सामने आई—न तो कोई दुबई कंपनी थी, न ही कोई असली निवेश।

WhatsApp Group Join Now

30 निवेशकों की गाढ़ी कमाई हड़पी

जांच में सामने आया कि सिर्फ एक साल में मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई और केरल के करीब 30 निवेशक इस जाल में फंस चुके थे। इनमें ज्यादातर बुजुर्ग और कारोबारी वर्ग के लोग थे, जिन्हें ऊंचे मुनाफे के सपने दिखाए गए थे।

शानो-शौकत से छिपा अपराध

प्रतीक का अंदाज़ किसी फिल्मी खलनायक से कम नहीं था। हेलिकॉप्टर की सवारी, पाँच सितारा होटलों में ठहरना, 25-25 लाख रुपये की घड़ियाँ, सुपरबाइक और किराए पर ली गईं लक्ज़री कारें—सब कुछ उसके पास था। लेकिन हकीकत ये थी कि ये सब ठगे गए पैसों से खड़ा किया गया एक झूठा साम्राज्य था।

पहले भी रहा है ठगी का मास्टरमाइंड

यह पहला मामला नहीं था। 2022 में चेन्नई पुलिस ने उस पर 2.82 करोड़ की ठगी का केस दर्ज किया था। वहीं मुंबई में एक कारोबारी से 4.17 करोड़ रुपये कंपनी के शेयर दिलाने के नाम पर हड़प लिए थे।

2024 में तो उसने और बड़ा खेल खेला। उसने सेंट किट्स की नागरिकता लेकर नया नाम "रोहन मेनन" रखा और उसी पहचान से अमीर निवेशकों को निशाना बनाया।

आखिरी चूक और गिरफ्तारी

कहते हैं झूठ चाहे कितना भी चमकदार क्यों न हो, एक न एक दिन टूटता ज़रूर है। प्रतीक की चूक थी—एक किराए की लक्ज़री कार और पुलिस की पैनी नजर। बेंगलुरु पुलिस ने उसे पकड़ लिया और पूरे ठगी साम्राज्य की परतें खुल गईं।

अब वो अदालत के सामने है और दर्जनों निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई वापस पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।


 

Tags

Share this story